कुठौंद में तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर टायर की दुकान में जा घुसी। इससे दुकान में बैठे पिता-पुत्री बोलेरो की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक का समधी भी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जिला अस्पताल लाया गया। हालत नाजुक होने के कारण यहां से उसे झांसी रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद चालक बोलेरो को मौके पर
छोड़कर भाग गया। घटनास्थल पर पहुंची थाना पुलिस ने बोलेरो को कब्जे में लेकर छानबीन श्ुारू कर दी है। कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम चनाबली निवासी गोपीचरन (50) अपनी 10 वर्षीय बेटी अनामिका को साथ लेकर बड़ी बेटी की ससुराल आलमपुर गया था। यहां से वह औरेया मार्ग पर बिचौली श्रमदान के पास स्थित अपने समधी छोटेलाल की टायर की दुकान
पर चले गए। यहां सभी लोग दुकान में ही बैठे थे। तभी सुबह तकरीबन साढ़े नौ बजे औरैया की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित हो गई और टायर की दुकान में जा घुसी। हादसे के वक्त गोपीचरन व उसकी बेटी अनामिका चारपाई पर बैठे थे। बोलेरो की सीधी टक्कर इन्हें लगी इससे इनके सिर में गंभीर चोटें आ गईं और थोड़ी देर बाद दोनों की मौके
पर ही मौत हो गई जबकि छोटेलाल गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने देखा तो वह घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने पुलिस को जानकारी देने के साथ ही घायल छोटेलाल को जिला अस्पताल भेज दिया। यहां पर हालत नाजुक होने के कारण उन्हें झांसी रेफर कर दिया। हादसे के बाद गाड़ी चालक व उसमें सवार लोग मौके से भागने में सफल रहे।
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और बोलेरो को कब्जे में लेकर छानबीन शुरू कर दी है।
शुरुआती जांच में जानकारी हुई है कि बोलेरो गाड़ी कैथवा गांव के एक व्यक्ति की थी और शादी समारोह के काम से कहीं जा रही थी। इसी दौरान हादसा हो गया। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।इस हादसे के बाद मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया है। एक साथ दो मौतें होने से परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं।
बेटी के हाथ कैसे होंगे पीले?
हादसे में गोपीचरन की मौत हो जाने के बाद अब उसकी बेटी की शादी का भी संकट खड़ा हो गया है। गोपीचरन की एक बेटी करीब 16 साल की है। दो-तीन साल बाद ही गोपीचरन को उसकी शादी करनी थी। बेटी की शादी के लिए गोपीचरन ने अभी से रुपये इकट्ठे करना शुरू कर दिया था। पर बुधवार को उनकी मौत हो जाने के बाद बेटी की शादी पर भी संकट खड़ा हो गया है। गोपीचरन ही घर का पूरा भरण पोषण करता था। परिवार के सामने पेट भरने का भी संकट खड़ा हो गया है।