उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नाम वापसी के अंतिम दिन मंगलवार को कांग्रेस व सपा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी उर्मिला सोनकर तय समय तक कलक्ट्रेट में डटी रही। देर शाम प्रशासन ने किसी भी नाम न वापस होने की औपाचारिक घोषण कर दी। घोषणा होते ही अब भाजपा व सपा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने है। दोनों में कांटे का मुकाबला माना जा रहा है।
बता दें कि जिला पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के दिन ही गैर भाजपा दलों ने प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाने शुरू किए थे। इसी कड़ी में सोमवार को कांग्रेस की प्रत्याशी उर्मिला ने आशंका जताई थी कि प्रशासन साजिशन उनकी नाम वापसी की घोषणा कर सकता है। इसको लेकर मंगलवार को सुबह से ही सपा और कांग्रेस के नेताओं के साथ उर्मिला कलक्ट्रेट परिसर पर ही मौजूद रही। दोपहर बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि किसी भी प्रत्याशी ने नाम वापसी नहीं की है।
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बसपा और निर्दलीय बन सकते निर्णायक
नाम वापसी के बाद अब चुनावी घमासान की तस्वीर एकदम साफ हो गई है। भाजपा से पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के सामने कांग्रेस की उर्मिला हैं। सपा ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। जबकि 7 सीटों के साथ मैदान में डटी बसपा और अन्य दलों के नेताओं ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस कारण उन्हें चुनाव में निर्णायक भी माना जा रहा है।
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दो सदस्यों पर कस रहा कानूनी शिकंजा
गैर भाजपा दल लगातार प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। सपा और कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए गोहन के जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सोनी और बबीना के निर्दोष यादव पर बेवजह कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। दोनो सदस्यों को पुलिस फर्जी मामलों में फंसाने का कुचक्र रच रही है। जिसे पार्ची किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।