रामलीला महोत्सव के समापन के बाद बीती रात भक्त प्रह्लाद नाटक का मंचन किया गया। नाटक में राजा हिरण्यकश्यपु विष्णु द्वारा उसके भाई हिरण्याक्ष का वध किए जाने से काफी आहत है। भगवान विष्णु से बैर बांध कर उनसे बदला लेने की भावना से अमरता का वरदान प्राप्त करने के लिये ब्रह्मा की घोर तपस्या करते हैैं। नाटक में दिखाया गया कि दैत्यराज
हिरण्यकश्यपु जब ब्रह्मा की तपस्या में लीन था तब देवराज इंद्र उसके राज्य पर चढ़ाई करके उसे जीत लेता है। बाद में भगवान विष्णु नृसिंह अवतार में प्रकट होते हैं और हिरण्यकश्यपु का उद्घार करते हैं। पवन दांतरे द्वारा लिखित और नरोत्तम स्वर्णकार द्वारा निर्देशित तथा अभिषेक रिछारिया व मृदुल दांतरे के सांकेतिकों की भूमिका से सजे इस यादगार नाटक में
हिरण्यकश्यपु की बहुत ही शानदार भूमिका सूर्यदीप सोनी, कयाधु की अतुल शर्मा, इंद्र रूपेश सोनी, बिष्णु व नृसिंह की कृष्णकांत वाजपेयी, प्रह्लाद की सोम शुक्ला, शंकर शिवम बबेले, ब्रह्मा जितेन्द्र सोनी, नारद सुशील दूरवार मिरकू महाराज, शुक्राचार्य रवि द्विवेदी, सचिव ध्रुव सोनी, सेनापति ऋषि झा, बिदूषक दीपू सोनी, द्वारपाल हिमांशु राठौर ने निभाई। अभिनय
विभाग के अध्यक्ष रमेश तिवारी व रामलीला समिति के अध्यक्ष सुधीर सोनी, मंत्री सीताशरण पटेल, संयोजक पुरुषोत्तमदास रिछारिया, हरिश्चंद्र तिवारी, राहुल तिवारी, नवनीत गुप्ता, कल्लू यादव, राजेन्द्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।