कोंच। धनुताल के मैदान में 25 हजार लोगों ने राम-रावण के युद्ध के रोमांच को देखा। देर शाम राम के बाण से रावण धराशायी हुई। इसके बाद धर्म की विजय का प्रतीक पुतला धू-धू कर जल उठा और चारों ओर जय श्रीराम का जयघोष गूंज उठा।
रामलीला की अंतिम मैदानी लीला दशहरा मेला में एक ओर राम और दूसरी ओर रावण के सैन्य शिविर बनाए गए थे। रावण और मेघनाद के पुतलों ने मैदान में दौड़ दौड़ कर युद्ध को सजीवता प्रदान की। मैदान के पूर्वी छोर पर 50 फीट ऊंची पक्की लंका के सबसे ऊपरी झरोखे में सीता विराजमान थीं। सामने रावण और मेघनाद के विशालकाय पुतले गाड़ियों पर कसे युद्ध के लिए तैयार खड़े थे। लंका विजय हनुमान मंदिर पर राम का सैन्य शिविर दर्शाया गया था, जबकि मैदान के दक्षिणी तरफ धनुताल के तट पर नंदीग्राम एक मचान के रूप में दर्शाया गया था।
एक घंटे तक चले युद्ध में मेघनाद की अमोघ शक्ति से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। हनुमान संजीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाते है। इसके बाद हुए युद्ध में मेघनाद मारा जाता है और उसके पुतले को आग लगा दी जाती है।
इसके बाद रावण युद्ध के लिए आता है। तीन दर्जन कहारों से युक्त विमान में बैठकर राम उससे युद्ध करते हैं। राम के बाणों में रावण डोलता हुआ धरती पर आ गिरता है और पुतले में आग लगा दी जाती है। रावण के पुतले का दहन होते ही जय श्रीराम के जयकारों से मैदान गूंज उठा। दशहरा मेला में प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। दो-दो ड्रोन कैमरों से पूरे मेला ग्राउंड पर पुलिस नजर गड़ाए हुए थी। डीएम राजेश कुमार पांडेय, एसपी डॉ दुर्गेश कुमार, एएसपी प्रदीप वर्मा मौजूद रहकर मेले की व्यवस्थाओं पर नजरें रखे रहे।
शक्ति लगने पर लक्ष्मण हुए मूर्च्छित, संजीवनी बूटी लाए हनुमान
जालौन। रामलीला महोत्सव में लक्ष्मण शक्ति व कालनेमि की माया का मंचन किया गया। नगर के गोविंदेश्वर मंदिर के पास आयोजित रामलीला की शुरुआत में राम ने लंका पर आक्रमण किए जाने की योजना बनाई गई। वानरों ने लंका को चारों ओर से घेर लिया। युद्धभूमि में मेघनाद व लक्ष्मण संवाद होता है।
मेघनाद, लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करता है। लक्ष्मण मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं। सुखेन वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी लाने जाते हैं। रास्ते में कालनेमि राक्षस माया फैलाकर हनुमानजी का रास्ता रोकने का प्रयास करता है। हनुमान कालनेमि की माया को समाप्त करते हैं। इसके बाद संजीवनी बूटी लाकर रामादल में पहुंचते है। लीला में राम की भूमिका मनोज तिवारी, लक्ष्मण शीपू पारासर, हनुमानजी रमेश दुबे, कालनेमि प्रयाग गुरु, रावण उमेश दुबे, सुखेन वैद्य बृजेश शर्मा, मेघनाथ की भूमिका भानू शर्मा ने निभाई। (संवाद)
भगवान राम ने मानवीय मूल्यों का आदर्श प्रस्तुत किया
कोटरा। बिहारी मंदिर रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला में लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन किया गया। रामलीला की प्रथम आरती जीआईसी झांसी के प्रधानाचार्य आलोक शांडिल्य ने उतारी। रामलीला में दर्शाया गया कि राम की आज्ञा पाकर वानर सेना ने लंका के चारों द्वारों को घेर कर चढ़ाई कर दी। मेघनाद युद्ध करने आता है। वह ब्रह्मशक्ति के बाण से लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाने के बाद लक्ष्मण की मूर्छा ठीक हो जाती है।रामलीला में कालनेमि बने विदूषक शरीफ हलचल द्वारा हास्य प्रस्तुति पर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। संचालन महेंद्र यादव ने किया। (संवाद)
फोटो-20-कोंच के दशहरा मैदान में युद्ध करते लक्ष्मण-हनुमान व मेघनाद। संवाद
फोटो-20-कोंच के दशहरा मैदान में युद्ध करते लक्ष्मण-हनुमान व मेघनाद। संवाद