उरई। पालिका चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। सपा के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने मंगलवार को आजमगढ़ की बसपा रैली में मंच पर पहुंचकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पूर्व सांसद के पाला बदलते ही जिले की सपा राजनीति में भी हड़कंप सा मच गया। बताया जाता है कि जनपद में पहली मर्तबा 2009 के लोकसभा चुनाव में घनश्याम अनुरागी ने सांसदी की सीट पार्टी की झोली में डाली थी। इसके बाद 2014 में वे भाजपा के भानू प्रताप वर्मा से चुनाव हार गए थे। करीब एक साल पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षी के चुनाव के वक्त उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। तब से वे सपा में अलग थलग पड़े थे। विधानसभा चुनाव 2017 के परिणाम आने के बाद से ही घनश्याम के पार्टी छोड़ने की चर्चा चल रही थी। कभी सीएम योगी से उनकी करीबी तो कभी राजस्थान भाजपा में शामिल होने की बातें हवा में तैर रही थीं। मंगलवार को इन सभी अटकलों पर उस वक्त विराम लग गया, जब घनश्याम लोगों को बसपा के मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के साथ खड़े दिखाई दिए। हालांकि पूर्व सांसद का मोबाइल देर रात तक बंद रहा, इस कारण उनसे बात नहीं की जा सकी। वहीं सपा के जिलाध्यक्ष वीरपाल दादी का कहना है कि पार्टी मुखिया ने घनश्याम को पहले ही बाहर का रास्ता दिखा रखा था, इसलिए वे चाहे बसपा में जाएं या फिर भाजपा में सपा को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेंद्र यादव और सुरेंद्र बजरिया का कहना है कि घनश्याम के सपा छोड़कर जाने से पार्टी कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत होगी।
बसपा में कुर्सी की दावेदारी बढ़ी
घनश्याम के बसपा में जाने से अब लोकसभा सीट के लिए दो दावेदार हो गए हैं। बसपा पार्टी ने पूर्व पालिका चेयरमैन रहे विजय चौधरी को पहले ही लोकसभा प्रभारी बना रखा है और विजय लोकसभा लड़ने की तैयारी में भी है, वहीं अब घनश्याम के आने से एक सीट पर दो दावेदार वाली स्थिति पैदा हो गई।