दिसंबर शुरू होने के साथ शुरू हुआ ठंड का कहर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। चौथे दिन रविवार को ठंड और बढ़ गई है। चार दिनों से सुबह की शुरुआत कोहरे के साथ ही हो रही है। ऐसे में आम जनजीवन खासा प्रभावित होने लगा है। शहर में अभी तक चौराहों पर अलाव न जलाए जाने से रिक्शा चालकों, मजदूरों व आम आदमी को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार को भी शहर में सर्दी लोगों के लिए परेशानी बनी रही। सुबह जब लोगों की नींद खुली और बाहर जाकर देखा तो चारों ओर कोहरा और धुंध दिखाई दी। भोर के समय कोहरा इस कदर घना था कि न तो वाहन दिख रहे थे और न ही आम आदमी। विजिबिलिटी तीन मीटर से भी कम थी। कोहरे की धुंध करीब 8.30 बजे तक छायी रही। वहीं, नौ बजते-बजते यह
थोड़ी कम हो चुकी थी। इससे यातायात व्यवस्था थोड़ी सुधरी और लोगों को गाड़ियां नजर आने लगीं। दिन भर ठंडी हवाएं चलतीं रहीं। शाम के वक्त तो हालात और भी खराब हो गए। सात बजते ही फिर से शहर में कोहरे की चादर छा गईं। इससे फिर वाहनों की रफ्तार फिर धीमी हो गई।
पांचवें दिन भी ट्रेनों की लेटलतीफी जारी
कोहरे का असर ट्रेनों पर साफ देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि अपने निर्धारित समय पर उरई स्टेशन आने वालीं ट्रेनें घंटों लेटलतीफ आ रही हैं। इससे यात्री सर्दी के बीच ट्रेनों का इंतजार करते हैं। पांचवें दिन रविवार को कोहरे के चलते 2534 पुष्पक दो घंटे, साबरमती डेढ़ घंटे, 2512 राप्ती सागर दो घंटे, 2598 मुंबई गोरखपुर दो घंटे, 2542 लोकमान्य तिलक
गोरखपुर मुंबई डेढ़ घंटे, कुशीनगर 15घंटे, गोरखपुर दो घंटे, ग्वालियर बरौनी 12 घंटे देरी से चली। वहीं, 2533 एक घंटा 1.40 देरी, 2108 लखनऊ एलटीटी 1 घंटा, साबरमती 6 घंटे देरी, 2944 तीन घंटे, 2541 पांच घंटे देरी से उरई स्टेशन पर पहुंची।
फसलें बचाने को खेतों में रात गुजार रहे किसान
इस समय खेतों में मटर, मसूर, अरहर समेत अन्य फसलें है, लेकिन अन्ना जानवरों की धमाचौकड़ी से किसान परेशान है। अन्ना जानवरों से फसलों को बचाने के लिए किसान ठिठुरन भरी सर्दी के बीच खेतों में रात गुजारने को मजबूर हैं। डकोर, माधौगढ़, रामपुरा समेत अन्य क्षेत्रों में किसानों ने खेतों पर झोपड़ी बनाकर रखी है।