नाली के पानी के निकासी को लेकर करीब पांच साल पहले हुए झगड़े में एक युवक की मौत के मामले में मंगलवार को सजा सुना दी गई। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट जज नरेंद्र कुमार तृतीय की अदालत में चल रही थी। जज ने दोनाें पक्षाें के गवाहों व अधिवक्ताआें की बहस सुनने के बाद चार आरोपियाें पर दोष सिद्ध हो जाने पर 10-10 साल की कैद
व 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस ने आरोपियाें को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। नदीगांव थाना के गांव परासनी निवासी चंद्रशेखर का गांव के ही जितेेंद्र आदि से नाली को लेकर विवाद हो गया था। 6 अक्तूूबर 2011 की रात करीब आठ बजे विरोधी जितेंद्र, रामस्वरुप, राजेश व कैलाश एक राय होकर चंद्रशेखर के दरवाजे हाथाें में लाठी डंडे
लेकर पहुंच गए और चंद्रशेखर पर हमला कर दिया। चीख पुकार सुनकर उसकी पत्नी किरन, चाचा रामदास व भाई ब्रजेश्वर प्रसाद उसे बचाने आया तो हमलावराें ने उन पर भी लाठियाें से हमलाकर दिया। इससे चाराें लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। चीख पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर आए और हमलावराें को ललकारा तो वह जान से मारने की
धमकी देकर भाग गए। ग्रामीणाें ने घायलाें को जिला अस्पताल पहुंचाया जहां से डाक्टर ने ब्रजेश्वर प्रसाद की हालत गंभीर होने पर डाक्टर ने उसे मेडिकल कालेजल झांसी रेफर कर दिया। परिजन उसे झांसी ले जा रहे थे तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। इस मामले में चंद्रशेखर की तहरीर पर नदीगांव थाना में हमलावर जितेंद्र , रामस्वरूप, राजेश व कैलाश के
खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने साक्ष्याें का संकलन कर आरोपियाें के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई एएसजे/ एफटीसी जज नरेंद्र कुमार तृतीय कर रहे थे। गवाहाें के ब्यान व साक्ष्याें व वकीलाें की दलील सुनने के बाद चाराें आरोपियाें पर दोष सिद्ध हो जाने पर दस-दस साल की कैद व 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। शासन की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता भगवती प्रसाद तिवारी ने की। जज ने जुर्माने में से आधा पैसा पीड़ित पक्ष को प्रतिकर के रुप में देने के निर्देश दिए है।