उरई (जालौन)। जिला कारागार उरई में कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद कैदी को पहले जिला अस्पताल और फिर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। कैदी के परिजनों ने जेल और जिला प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
उरई कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला उमरारखेड़ा निवासी मेवा उर्फ मेवालाल चौधरी (58) 30 अगस्त 2024 से जिला कारागार में जहरखुरानी के मामले में दोष सिद्ध होने के बाद से सजा काट रहे थे। सूत्रों के अनुसार रविवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर कारागार चिकित्साधिकारी ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
हालांकि, मेडिकल कॉलेज में भी उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और रविवार रात करीब सवा दस बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना की सूचना तत्काल जेल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को दे दी गई।
मेवा के पुत्र सुमित ने आरोप लगाया कि उनके पिता को समय पर समुचित इलाज नहीं मिला, जिसके चलते उनकी जान चली गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पिता को जहरखुरानी के 15 साल पुराने मामले में झूठा फंसाया गया था। सुमित के अनुसार इस मामले में कुल छह आरोपी थे जिनमें से पांच को न्यायालय ने बरी कर दिया, जबकि उनके पिता को ही सात वर्ष का कारावास सुनाया। मेवालाल की मौत की खबर मिलते ही उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी, दो पुत्रों और एक पुत्री का रो-रोकर बुरा हाल है।