शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका भले ही लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर में हर, गली मोहल्ले में कूडे़ के अंबार व नालियों में गंदगी भरी पड़ी है। साफ सफाई न होने पर लोगों को स्वयं ही अपने दरवाजों पर झाड़ू लगानी पड़ रही है।
उरई शहर की आबादी लगभग दो लाख है। इसमें 28 वार्ड हैं। शहर में साफ सफाई के लिए पालिका में 272 संविदा सफाई कर्मचारी हैं। इनको प्रत्येक माह में 42 लाख 30 हजार रुपये वेतन के रूप में पालिका से भुगतान किया जाता है। वहीं, स्थायी सफाई कर्मी सिर्फ 116 हैं। इनको प्रति माह 22 लाख रुपये वेतन दिया जाता है।
सभी सफाई कर्मियों को प्रतिमाह 71 लाख 62 हजार रुपये वेतन के रूप में पालिका से दिया जाता है। इसके अलावा किट खर्च कलई, चूना, गाड़ी, ट्रैक्टर, जेसीबी आदि के खर्च अलग से किए जाते हैं। शहर में कई स्थान ऐसे हैं, जहां वर्ष में एक बार भी सफाई नहीं की जाती है।
बजरिया, तिलक नगर, राजकीय कालोनी, शांति नगर, उमरारखेरा, लहारियापुरवा समेत कई मोहल्लों में गंदगी का अंबार है। शहर का कूड़ा चौराहे पर जमा होता है। सड़कों से गुजरने वालों को इसकी दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। मोहल्लों में कूड़ा जमा करने के लिए पालिका ने बाक्स लगा दिए हैं, मगर मोहल्ले के लोग इन बाक्सों डिब्बों में कूड़ा न डालकर बाक्स के पास ही फेंक देते हैैं।
पालिका के सफाई निरीक्षक संदीप कुमार का कहना है कि शहर की आबादी के हिसाब से सफाई कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। इनकी संख्या बढे़, तभी सफाई व्यवस्था पटरी पर आ सकती है। वैसे तो पालिका सफाई कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।