उरई। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर सुहाग महल पुल का निर्माण किया जा रहा है। दोपहिया वाहन सवारों के लिए अस्थायी मिट्टी का कच्चा रास्ता बनाया गया है, लेकिन जिसमें कोई सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए। रात में भारी वाहन भी निकल रहे थे। शनिवार रात सीमेंट से भरा एक ट्रक इस अस्थायी पुल में फंस गया, जिससे आवागमन प्रभावित रहा।
शनिवार को ट्रक के फंसने से दो घंटे पहले एक ई-रिक्शा भी इसी पुल पर पलट गया था, इसमें तीन लोग घायल हो गए। अमर उजाला ने 29 मार्च के अंक में ‘अस्थायी पुल पहले ही दिन हो गया कमजोर’ शीर्षक से खबर छापी थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है।
शहर के सुहाग महल के पास अंग्रेजों के जमाने का पुल बना हुआ था। नए पुल के निर्माण कार्य के चलते पुराने को ढहा दिया गया है। सुहाग महल का पुल शहर के मुख्य बाजार को जोड़ता है। रोजाना यहां से करीब एक लाख लोग और चार से पांच हजार वाहन गुजरते हैं। जिसको हटाकर 1.88 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जा रहा है। आवागमन प्रभावित न हो इसके लिए अस्थायी मिट्टी का पुल बनाया गया है, लेकिन इसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया।
इस अस्थायी पुल का निर्माण पानी के ऊपर मिट्टी डालकर किया गया है, जिससे मिट्टी गीली होकर धंसने लगी है। जिससे बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। शनिवार रात करीब नौ बजे एक सीमेंट से लदा ट्रक जब इस अस्थायी पुल से गुजर रहा था। तभी मिट्टी धंस गई और ट्रक फंस गया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। हालांकि, ट्रक फंसने के कारण सुबह तक आवागमन बाधित रहा। स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर बाइक से किसी तरह पुल पार कर रहे हैं।
शनिवार रात करीब सात बजे एक ई-रिक्शा भी अस्थायी पुल से गुजरते समय पलट गया, जिससे उसमें सवार लोग नाले में गिर गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पानी में कूदकर उनकी जान बचाई। रिक्शे में एक महिला और बच्चा भी सवार थे। इस हादसे के बावजूद, प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी अमित सक्सेना ने कहा कि दोपहिया वाहनों के लिए अस्थायी पुल बनाया गया है। यहां से भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी रात के समय ट्रक घुस गया था। इससे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसे सही किया जा रहा है।