मुहम्मदाबाद। मुहम्मदाबाद गांव स्थित रामजानकी मंदिर परिसर में चल रही दिवारी प्रतियोगिता के तीसरे सोमवार को खिलाड़ियों ने आग का गोला फेंक कर करतब दिखाए। एक दर्जन टीमों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परंपरा और संस्कृति से जुड़ीं यह प्रतियोगिता में बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों की टीमें हिस्सा लेती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ कैलाश राजपूत ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से गांवों में आपसी मेलजोल और परंपराओं के संरक्षण की भावना मजबूत होती है। प्रतियोगिता में शामिल सभी टीमों के कप्तानों का माला पहनाकर और तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
इस मौके पर धगुवा, डकोर, मुहम्मदाबाद, कुसमिलिया, जैसारी, कहटा, झांसी, ददरी समेत कई टीमों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक टीम को आधे घंटे का समय दिया गया। इसमें उन्हें पारंपरिक गीत, नृत्य और दिवारी के विविध कार्यक्रम प्रस्तुत करने थे। रेफरी टीम ने अंक देकर विजेता टीम का चयन किया।
मुहम्मदाबाद टीम के कप्तान दीपू यादव की ओर से जब शिवपाल यादव ने दिवारी गीत “जग में जब-जब जुल्म भए.. गाया तो पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। जवाबी गीत में डकोर टीम के कप्तान गजराज पाल ने “हती हमारी गिर गई. गाकर समा बांध दिया। मंगरौठ (हमीरपुर) टीम के कप्तान राजू और करमेर मिनौरा के कप्तान सोबरन यादव की टीमों ने भी दमदार प्रदर्शन किया। निर्णायक मंडल में विकास राजपूत, रामदास राजपूत, मधुर राजपूत, अनिल राजपूत शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन कृष्णदत्त तिवारी, राधेश्याम राजपूत, अरुण कुमार, अशोक राजपूत, पूरन वर्मा ने किया। इस दौरान हाजी मुनीन हैदर बैग, जावेद अख्तर, प्रभाकर राजपूत, डॉ. रामसिंह, राज गुप्ता, अंकुर शिवहरे, मोतीलाल आदि रहे।