उरई (जालौन)। शनि अमावस्या 22 नवंबर को है। मंदिरों में आज मंदिरों में पूरे दिन तैयारियां चलीं। अगहन महीने में शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या का खास महत्व है। शनि अमावस्या पर भगवान शनि देव की पूजा अर्चना से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पं. गौरव महाराज बताते हैं कि श्रीमद्भगवद गीता में शनि देव महाराज को विशेष स्थान दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि शनि अमावस्या के दिन शनि देव का अभिषेक करने से नौ ग्रहों के प्रकोप से छुटकारा मिलता है।
शनि अमावस्या को लेकर शुक्रवार की सुबह से ही नगर के शनि मंदिरों में साफ सफाई व सजावट का काम शुरू हो गया। रात में सभी मंदिर रंग बिरंगी विद्युत झालरों से जगमगा उठे। शनिवार को सभी शनि मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। शनि धाम गोदेश्वर बाबा मंदिर में शनि अमावस्या पर सुबह 8 बजे शनि देव महाराज को महा स्नान कराया जाएगा, इसके बाद उनका भव्य श्रृंगार कर सवामनी हवन कर महाआरती का आयोजन होगा। गोदेश्वर बाबा मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि अमावस्या पर शनि देव की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। इस दिन वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजन करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
उधर, ज्योतिषाचार्य पं. गौरव महाराज का कहना है कि शनि अमावस्या का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि शनि देव अपनी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यांतरदशा, सूक्ष्मदशा, प्राणदशा, लौहपाद, अशुभ गोचर, साढे़साती एवं ढैया के दौरान व्यक्ति को अपना शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं। इस दिन शनि को प्रसन्न करना बहुत आसान होता है। नौ ग्रहों के प्रकोप को शांत करने के लिए शनि देव का अभिषेक विशेष फलदायी है।