उरई (जालौन)। जिले में सूखा पड़ने से खरीफ की फसल बुरी तरह प्र्रभावित हुई है। किसानों ने कड़ी मेहनत कर फसल बोई थी, लेकिन पानी न बरसने से फसलें चौपट हो गईं। फसलों के बर्बाद होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। किसानों ने अब सरकार से उम्मीद लगाए हैं कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दैवीय आपदा प्रबंधन के जरिए मदद करें। वहीं, कृषि विभाग ने माना है कि 80 फीसदी फसल का नुकसान हो चुका है और यह रिपोर्ट शासन को भी भेजी जा चुकी है।
बीते वर्ष हुई जलवृष्टि से किसानों की खरीफ की फसल प्रभावित हुई थी तो मौजूदा वर्ष में सूखा ने किसानों की खरीफ की फसल बर्बाद कर दी। पूरे जिले में 67565 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई हुई थी। फसल उग भी आई, लेकिन जब पानी समय पर नहीं मिला तो खेतों में फसलें सूखने लगी और आज स्थिति यह है कि बुआई के सापेक्ष 54109 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हो चुकी है। 80.08 फीसदी नुकसान का आंकलन कृषि विभाग ने किया है। यह आंकलन वह है, जिन किसानों की 50 प्रतिशत से अधिक फसल प्रभावित हुई है। यह आंकडे़ बता रहे हैं कि इस समय किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। एक तरफ लगातार दैवीय आपदाओं का दंश किसानों को झेलना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ कृषि कार्य के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है, जिससे यहां का किसान कर्ज के बोझ से दबता जा रहा है।
उधर, इस बाबत गांव सरावन निवासी किसान संतोष तिगुनायक का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को खरीफ की फसल के नुकसान का मुआवजा दे। गांव रेंढ़र निवासी दीपक पांडेय का कहना है कि जिले में सूखा पड़ने से किसानों के ऊपर आर्थिक संकट आ गया है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के सभी प्रकार के ऋण माफ कर सहूलियत प्रदान करें। गांव सहाव निवासी प्रदीप गुर्जर का कहना है कि सूखा पड़ने से खरीफ की फसल चौपट हो गई है। यह जानकर भी सरकार ने अब तक जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है, जिससे किसान परेशान हैं। सबसे पहले किसानों से हो रही ऋण वसूली को रोका जाए और फिर किसानों की आर्थिक संकट को देखते हुए सारे कर्ज माफ किए जाए।