उरई (जालौन)। शिक्षा विभाग में अजब गजब खेल देखने को मिलता है। लाइसेंसी शस्त्र की दुकान चलाने वाला महेवा क्षेत्र के गांव लौना में प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात है। नियमानुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी नौकरी में रहते हुए, कोई व्यवसाय नहीं कर सकता। इसके चलते पांच साल तक निलंबित रहने के बाद जोड़ जुगाड़ से इसी साल के शुरू में सवेतन बहाल हो गया। इस समय वह निलंबन अवधि का वेतन हासिल करने की जुगत भिड़ाने में लगा है।
महेवा क्षेत्र के गांव लौना के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात सतीश कुमार शर्मा की स्टेशन रोड पर प्रकाश गन हाउस के नाम से शस्त्र की दुकान संचालित है। सरकारी नौकरी में रहते हुए कारोबार करने के नाते शस्त्र विक्र्रेता का लाइसेंस धारक होने के आरोप में उन्हें 07 मार्च वर्ष 2008 को निलंबित किया गया था। लगातार पांच साल से ज्यादा समय तक निलंबित रहने के बाद 22 मार्च 2013 को तत्कालीन बीएसए वरुण कुमार सिंह ने इस शर्त के साथ सवेतन बहाली का आदेश दिया कि यदि छह माह तक शस्त्र बेचने का लाइसेंस स्थानांतरित या निरस्त नहीं होता तो यह समझा जाएगा कि सेवा के साथ-साथ व्यवसाय कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर दी जाएगी।
बहाली शर्त के अनुसार छह महीने की अवधि भी बीते दो महीने हो रहे हैं, लेकिन अभी तक महकमे की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि टीचर की स्टेशन रोड स्थित शस्त्र की दुकान आज भी संचालित है। निलंबन अवधि के एरियर भुगतान के लिए प्रयासरत टीचर सतीश कुमार शर्मा के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी दीपक बाबू ने 11 नवंबर को बीएसए तथा महेबा क्षेत्र के खंड शिक्षाधिकारी को एक सप्ताह में जांच करने के लिए पत्र भी लिखा परंतु 15 दिन बीतने के बाद भी बीएसए दिनेश कुमार राठौर व महेबा के खंड शिक्षाधिकारी विनोद कुमार पटैरिया ने अभी तक जांच करने की जहमत नहीं उठाई है।