उरई (जालौन)। चिटफंड कंपनियोें का ठगने का फंडा भी अजीब है। वह धन दोगुना करने का लालच देकर चार वर्ष बाद चेक देती है और जब निवेशक भुनाने जाता है तो पता चलता है कि यह खाता ही बंद हो चुका है। ठगी भटकते हैं और ठग दूसरे नाम से रजिस्ट्रेशन करवाकर ठगी का धंधा करने लगते हैं। ऐसा ही हुआ एक रिटायर्ड फौजी के साथ जिसे भी इन ठगों ने ठग लिया। पीड़ित पूर्व फौजी ने आलाधिकारियों को पत्र देकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
जालौन नगर निवासी पूर्व फौजी सुंदर सिंह कुशवाहा ने एसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 10-11 में उसने बुंदेलखंड गोट फार्ममिंग प्राइवेट लिमिटेड राजेंद्र नगर उरई में सुनील सिंह निवासी पटेल नगर जायसवाल टावर के पास दो लाख रुपये निवेश किया था। कंपनी के संचालक ने एफडी कर दोगुने पैसे की पंजाब नेशनल बैंक से चेक दी थी। समयावधि पूरी होने के बाद जब वह पैसा निकालने गया तो वह खाता बंद हो गया था। जब उसने इसकी शिकायत सीओ से की तो उक्त कंपनी का संचालक बोरिया बिस्तर समेटकर भाग गया। दो वर्ष बाद उक्त सुनील सिंह ने कंपनी का नाम बदलकर एलआरएन फिंकोन ग्रुप के नाम से रजिस्ट्रेशन करवा लिया और शहर के अंबेडकर चौराहा के आगे मामू भांजे की मजार के पास उक्त चिटफंड कंपनी चला रहा है। एसपी राकेश शंकर ने आश्वासन दिया है, कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बताते चले कि चार दिन पूर्व शहर के स्टेशन रोड स्थित ईजीवे कंपनी जिले के कई निवेशकों का पांच करोड़ रुपये लेकर चंपत हो गई है जिसके संचालक जेजे सिंह की पुलिस तलाश कर रही है जबकि उसके दो साथी रमनदीप व करुणेंद्र को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
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चिटफंड कंपनियों की जांच सीमित बनी
उरई (जालौन)। शहर के स्टेशन रोड स्थित ईजीवे कंपनी के संचालकों द्वारा निवेशकों की पांच करोड़ का माल लेकर भागने के मामलों की खबरें अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद डीएम रामगणेश ने संज्ञान लिया। उन्होंने पांच सदस्यीय टीम गठित कर जिले में चल रही सत्तर चिटफंड कंपनियों की जांच कर आख्या मांगी है।
डीएम ने कहा कि ईजीवे कंपनी के संचालक निवेशकों का पांच करोड़ रुपये लेकर फरार होने का मामला संगीन है। इस मामले की एफआईआर कोतवाली में दर्ज करवा दी गई है। जिले में जो 70 चिटफंड कंपनियां चल रहीं हैं वह लोगों के साथ ठगी कर फरार न हो पाएं। इसके लिए उन्होंने एडीएम की अध्यक्षता में एक टीम गठित की है जिसमें एएसपी, नगर मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ कोषाधिकारी, मुख्य प्रबंधक अग्रणी बैंक को नामित किया है। यह टीम इन चिटफंड कंपनियों की वैधता व लाइसेंस की जांच करेगी। लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया या नहीं। कंपनी द्वारा नियमों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं, टीम सभी चिटफंड कंपनियों की जांच कर उन्हें रिपोर्ट देंगे। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।