उरई। योगी सरकार कार्यकाल के मंगलवार को दो वर्ष पूरे हो गए। इन दो सालों में सरकार ने अपने घोषणा पत्र में किए कई वादों को पूर्ण किया है तो वहीं अभी भी कुछ योजनाएं अधर में है। मतलब साफ है कि थोड़ा है, थोड़े और की जरूरत है। सड़कों के नाम पर जिले को 2248.63 लाख का बजट तो मिला है लेकिन जनपद पूरी तरह से गड्ढामुक्त नहीं हो सका है। यहां तक उरई शहर की ही कई सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो पाई हैं। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसे योजनाओं पर भी ध्यान दिया गया, पर पूरी तरह से निदान नहीं हो सका है। हाथ कागज उद्योग को सहूलियतें देकर कारोबारियों को राहत तो पहुंचाई गई पर बाजार की कमी अभी तक खल रही है। सरकार के दो साल के कार्यकाल की स्थिति को दर्शाती रिपोर्ट-
एट को मिला पंचायत का दर्जा
एट। योगी सरकार के दो साल के कार्यकाल में एट को जिला पंचायत का दर्जा मिलना प्रमुख उपलब्धि है। योगी सरकार ने गांवों के विकास करने का वादा एट को पंचायत का दर्जा दिलाकर पूरा किया। बता दें कि यह मांग कई सालों से चल रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी एट कस्बे में पहुंच कर एट को पंचायत का दर्जा दिलाने की घोषणा की थी, लेकिन यह उपलब्धि भाजपा सरकार के खाते में आई। हालांकि अभी तक नगर पंचायत की प्रक्रिया पूरी न होने से विकास कार्य भी रफ्तार नहीं पकड़ सके हैं।
सौभाग्य योजना से घरों में पहुंची बिजली
उरई। जिले में सौभाग्य योजना भी योगी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में है। इस योजना के माध्यम से जिले में घर-घर बिजली पहुंचाने का कार्य किया गया है। बिजली विभाग के अधिकारियों की मानें तो नवंबर माह में सर्वे के बाद जिले की 575 ग्राम पंचायतों के 1057 गांवों को योजना में चयनित किया गया था। इसके तहत सभी गांवों में हर घर तक बिजली पहुंचा दी गई है। इसके साथ ही कैंप अभियान के तहत जिले के सभी गांवों में फ्री कनेक्शन भी दिए गए है। फिर भी कोंच, जालौन, कालपी और माधौगढ़ की तहसीलों के कई गांवों में आज भी बल्लियों के सहारे बिजली व्यवस्था चल रही है।
3.16 करोड़ से हुआ 55 हजार किसानों का कर्ज माफ
उरई। किसानों के लिए भाजपा सरकार का कर्जमाफी करने का वादा संजीवनी साबित हुआ। पहली कैबिनेट बैठक में ही सरकार ने कर्ज माफी का वादा पूरा किया। जिससे जिले के करीब 55 हजार किसानों को फायदा पहुंचा। जो सरकार की बड़ी उपलब्धियों में एक है। इससे साहूकारों के कर्ज से परेशान किसानों को राहत मिली। आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 84 हजार किसान पंजीकृत है, इसमें से 55,819 किसानों को कर्ज माफी का लाभ मिला। हालांकि सिंचाई की समस्या अभी भी जस की तस बनी रही। माइनर और रजबहों में पानी की कमी किसानों की परेशानी का कारण बनी रही। इसी तरह समितियों से खाद बीज लेने में भी किसानों के पसीने छूट गए।
जिले में बने 1.57 लाख नए इज्जत घर
उरई। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करते हुए योगी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के अंतर्गत घर घर शौचालय बनाने की मुहिम चलाई। इस योजना के तहत जिले के डेढ़ लाख पात्रों के घरों में शौचालय बनाए गए। इससे जहां ग्रामीणों को खुले में शौच सें मुक्ति मिली तो वहीं महिलाओं ने इस योजना को अपने सम्मान से जोड़कर देखा। अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष 1.57 लाख शौचालय बनाकर जिले के 95 प्रतिशत गांवों को ओडीएफ बनाया जा चुका है। योजना के लक्ष्य को 90 से 95 फीसदी तक पूर्ण कर लिया। अधिकारियों की मानें तो इस वर्ष जिले के सभी नौ ब्लाकों में विभाग ने कुल 1.57 हजार नए शौचालयों का निर्माण कराया है। इसके साथ जिले के 929 गांवों में से 910 गांवों को ओडीएफ भी घोषित कर दिया है। इसके बाद भी कई पात्र लेखपाल और सचिव के चक्कर ही काट रहे हैं, कहीं किस्त की समस्या है तो कहीं सूची से नाम कटने की शिकायत, जिनसे अधिकारी उबर नहीं पा रहे हैं।
शासन की योजना से कागज उद्योग को लगे पंख
कालपी। योगी सरकार का दो वर्ष का कार्यकाल जिले के बंदी की कगार पर पहुंचे कागज उद्योग के लिए नई ऊर्जा भरा रहा है। सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में कालपी के हाथ कागज उद्योग का चयन होने के बाद से कागज उद्योग की चमक लौटने लगी है। हाथ कागज उद्योग यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी का कहना है कि एक जिला एक उत्पाद योजना में चयन के बाद उत्पाद की मार्केटिंग में लिए भी सुनहरी योजना बनाई गई है। इसके लिए शासन की ओर से बजट भी अवमुक्त किया गया है। यह बात और है कि डीएम की ओर से सरकारी कार्यलयों में हाथ कागज की सामग्री के इस्तेमाल के आदेश के बाद भी कागज की खरीद नहीं शुरू हो सकी है। जिससे कागज उद्योग अभी भी बाजार की बाट जोह रहा है।
2248.63 लाख रुपये की सड़कों हुआ शिलान्यास
उरई। जिले की तीनों विधान सभा में चयनित सड़कों के लिए 2248.63 लाख रुपये स्वीकृति के साथ बजट का भी आवंटन कर दिया है। इसमें उरई विधान सभा में 251.75, कालपी में 1604.75 व माधौगढ़ विधान सभा में 392.13 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। यह बजट लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पास किया गया, अब इसका क्रियान्वयन चुनाव बाद ही हो सकेगा, हो सकता है कि आने वाले समय में जनपद के लोगों को सड़कों की अच्छी सुविधा मिले। फिलहाल की स्थिति तो यह है कि प्रशासन ने सीएम के गड्ढ़ मुक्त सड़क के अभियान को ही गंभीरता से नहीं लिया। जिस कारण शायद ही कोई ऐसा गांव या कस्बा हो जहां गड्ढायुक्त सड़कें देखने को न मिल जाए।