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‘जो कभी गाती थी तो कभी-कभी हंसाती थी...’

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उरई। सुषमा नवोदित कवि मंच के तत्वावधान में सिटी सेंटर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान जाने माने कवियों ने हास्य व्यंग्य व श्रृंगार रस की एक से एक बेहतरीन रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कवि सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती पूजन व वंदना के साथ हुआ। जयपुर से आई कवयित्री श्रुति छाया की गजल ‘मोहब्बत की निशानी कह रही जिसको दुनिया, वह केवल मकबरा है बस हजारों बेगुनाहों का’ काफी सराही गई। इसी कड़ी में दिल्ली से आई सानिया ‘सोनू’ ने ‘जो कभी गाती थी तो कभी-कभी हंसाती थी, गुनगुनाती थी मेरे आंगन की चिड़िया’ पंक्तियां सुनाकर सबका मन मोह लिया।

बस्ती से आए कवि जयदीप पांडेय ने ‘रंग सुनहरा नाजुक चेहरा होंठों पर मुस्कान लिए, लाखों परियों में दिखती है, एक अलग पहचान लिए’ गीत सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। अयोध्या से आए कवि वेद प्रकाश द्विवेदी ने पढ़ा ‘आसमान में जब तक शोभित चांद सितारे हैं।’ इसके बाद प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ ने ‘चलो छोड़ो हर एक तकरार मेरे यार होली में, करो बस प्यार की बौछार मेरे यार होली में’ होली गीत सुनाकर माहौल होलीमय कर दिया।
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कवि सम्मेलन की अध्यक्षता विनोद गौतम ने की। अंत में कवियों को प्रशस्ती पत्र व स्मृति चिंह्न देकर सम्मानित किया। बाद में सुषमा नवोदित मंच की राष्ट्रीय कार्यकारणी का गठन किया गया। इस दौरान शायर शफीकुर्रहमान कश्पी, गिरधर खरेे, सरल श्रीवास्तव, कृपाराम ‘कृपालु’, डॉ. अनुज भदौरिया, तपस्या जायसवाल, शैलेंद्र ‘मासूम’ व चंदन तिवारी आदि ने काव्य पाठ किया।
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