उरई। गर्मी का मौसम अभी शुरू भी नहीं हुआ है कि लोगों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर गांव कस्बे की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। जहां देखने के लिए तो नलकूप और टंकिया सब कुछ हैं, लेकिन पानी देने के नाम पर सूखा ही रहता है। ग्रामीण महिलाओं को दूरदराज से पानी ढोने की मजबूरी से जूझना पड़ रहा है। कहीं कहीं पर तो फिर से लोगों को या तो कुओं का सहरा लेना पड़ रहा है या फिर किराए पर टैंकर मंगाकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
ज्ञात हो कि पिछले ही साल प्रदेश के तीन-तीन मंत्रियों ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर पेयजल किल्लत को दूर करने का दावा किया था। गांव-गांव में पाइप लाइन बिछाने बात भी कही गई थी पर हुआ कुछ भी नहीं। दोबारा फिर गर्मी आ रही है और अभी से ही लोगों को पेयजल एक बड़ी समस्या नजर आने लगी है। कहना है कि यही हाल रहा तो मई जून के महीनों में तो एक-एक बाल्टी पानी के लिए पसीना बहाना पड़ेगा। महेबा ब्लाक के ग्रामीण इलाकों में तो हैंडपंप बिना हत्थे के ही खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि जल्द ही खराब पड़े नलकूपों और हैंडपंपों का सर्वे कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा।
सभी 18 हैंडपंप दे रहे महीनों से खारा पानी
एट। क्षेत्र के गिरधान गांव की करीब 4000 आबादी के बीच देखने को तो 18 हैंडपंप लगे हैं, लेकिन सभी से खारा पानी ही आता है। लिहाजा ग्रामीण उसे पीने के लिए इस्तेमाल ही नहीं करते हैं। ऐसे में गांव से कुछ दूरी पर स्थित कुआं ही पेयजल का एकमात्र सहारा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दुनिया कुओं से दूर जा रही है और यहां के लोगों को कुएं पर ही निर्भर हरना पड़ता है। ग्राम प्रधान शकीला बानो का कहना है कि नलकूप तैयार कर गांव में पाइप लाइन बिछाई तो गई है लेकिन लीकेज के कारण अभी उसे चालू नहीं किया गया है। जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
6 माह से बंद पड़ा एक ट्यूबवेल
सरावन। क्षेत्र स्थित जल संस्थान का एक ट्यूबवेल पिछले करीब 6 माह से बंद पड़ा है। पूरी सप्लाई सिर्फ एक ही ट्यूबवेल पर निर्भर है। क्षेत्र में लगे आधे हैंडपंप भी पानी का साथ अभी से ही छोड़ने लगे हैं। ऐसे में गर्मी के दिनों में मुसीबत तय है। ग्रामीण नासिर मंसूरी, संतोष रुमार, टिंकू गुप्ता, लाखन सिंह आदि का कहना है कि हर साल गर्मी में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। अधिकारी आते हैं और निरीक्षण कर सिर्फ आश्वासन दे जाते हैं, समस्या का समाधान कभी नहीं किया जाता है। इस बार भी बंद ट्यूबवेल के कारण गर्मी में पानी की किल्लत का सामना करना तय है।
आधा दर्जन वार्डों में पेयजल किल्लत
कदौरा/आटा। नगर पंचायत के करीब आधा दर्जन से अधिक वार्डों में पेयजल किल्लत अभी से ही चरम पर है। पानी भरने के लिए लोगों को कही-कहीं पर तो एक-एक किमी तक की दूरी तय करनी पड़ रही है। मोहल्ला इस्लामाबाद, पुरवा, सिद्धार्थनगर, ईदगाह, हवेली के अधिकांश हैंडपंप खराब हैं। गुस्साए लोग नगर पंचायत कार्यालय से लेकर जल निगम व जल संस्थान के ऑफिस तक में हो हल्ला कर चुके हैं। हुआ कुछ नहीं तो अब पास पड़ोस के सबमर्सिबल से पानी लेकर काम चलाया जा रहा है। आटा के बीजापुर गांव में भी छह हजार की आबादी हैंडपंप की खराबी से पेयजल की किल्लत से जूझ रही है।
अभी से कम होने लगा पचनद का जलस्तर
रामपुरा। पचनद नदी का जलस्तर गर्मी की शुरूआत से गिरना शुरू हो गया है। पांच नदियों के संगम का पानी अभी से ही कम होने से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। इन पांच नदियों में चंबल और यमुना भी शामिल है। इलाकाई लोगों की मानें तो इन नदियों के जल प्रवाह में कमी होने का मुख्य कारण यहां पर अनवरत बहने वाले झरने हैं, जो पृथ्वी के गर्भ को चीरते हुए भूपटल पर आते थे अब समाप्त हो गए हैं। इसके अलावा बांध भी इन नदियों की समाप्ति का कारण बनते जा रहे हैं। जाहिर है कि जब नदियों का जलस्तर गिरेगा का तो जनपद की पेयजल व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ना तय है।