उरई। उरई से कानपुर और झांसी को जोड़ने वाले सड़क भले ही राजमार्ग कही जाती हो लेकिन मार्ग पर गड्ढों की संख्या इतनी है कि उन्हें अब गिना भी नहीं जा सकता है। वह भी तब, जब इसी मार्ग पर जिला महिला और पुरुष अस्पताल, कोतवाली और तमाम बैंक व डाकघर भी स्थापित हैं।
इस सड़क पर दिनभर न जाने कितने जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों की गाड़ियां इन गड्ढों पर हिचकोले खाते गुजरती हैं, लेकिन आज तक सड़क की सुध नहीं ली गई। गड्ढों के कारण रोजाना सात आठ दोपहिया वाहन गिरते हैं और उन्हें चलाने वाले चुटहिल भी हो रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही राजमार्ग का कायाकल्प किया जाएगा।
बता दें कि बिलरांया पनवाड़ी राजमार्ग कानपुर और झांसी को भी जोड़ता है और यह शहर का मुख्य मार्ग भी कहलाता है। बात सिर्फ कालपी बस स्टैंड से लेकर शहीद भगत सिंह चौराहे तक की करीब एक किमी. सड़क की तो पूरी सड़क उधड़ी पड़ी है। प्रदेश सरकार बनने के वक्त यानी करीब दो साल पहले गड्ढामुक्त अभियान के नाम पर मामूली पैचवर्क किया गया था, जो कि फिर से गड्ढों में तब्दील हो गया है।
स्थिति यह है कि शहीद भगत सिंह चौराहे से कालपी स्टैंड तक पहुंचने में ही ई रिक्शा, रिक्शा व आटो-टेंपो में बैठी सवारियों को इस कदर गड्ढे पर उछलती हैं कि उनके सिर वाहनों की छतों से टकराकर चुटहिल तक हो जाते हैं। रोड पर ही जिला अस्पताल भी हैं, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भी गड्ढों की दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। ऐसी ही मुश्किलों से बैंक और डाकघर कर्मियों को भी रोजाना दो चार होना पड़ता है।
जिला अस्पताल कर्मी जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि राजमार्ग के दोनों ओर इस कदर गड्ढे हैं कि बाइक चलाने में जरा सी चूक, कोई दुर्घटना करा सकती है, बिना हेलमेट के तो रोड पर वाहन चलाना ही नहीं चाहिए।
बजरिया निवासी टेलर का काम करने वाले रईस का कहना है कि बरसात के दिनों में तो गड्ढों के कारण सड़क पर चलना और भी खतरनाक है, पता ही नहीं चलता है कि कहां सड़क है और कहां गड्ढा। इससे भी वाहन सवार गिरकर चुटहिल हो रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता ने कहा कि सड़क की समस्या विभाग की जानकारी में हैं, जिसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था और शासन ने पूरे 9 किमी. लंबे राजमार्ग के लिए करीब सवा करोड़ का बजट स्वीकृत भी कर दिया है, जल्द ही राजमार्ग का कायाकल्प किया जाएगा।