उरई। राष्ट्रीय कुष्ठ जागरुकता अभियान के अंतर्गत जिले में चलाए गए कुष्ठ रोगी खोज अभियान में 49 नए कुष्ठ रोगी मिले है। विभाग ने उनका पंजीकरण कर उनका इलाज शुरू कर दिया है। अभियान के दौरान सबसे ज्यादा कुष्ठ रोगी बाबई क्षेत्र में मिले है। यहां आठ नए रोगियों को टीम ने खोजा है।
शासन ने सन् 2022 तक कुष्ठ मुक्त भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस साल कुष्ठ के विरुद्ध आखिरी युद्ध थीम पर 30 जनवरी से 13 फरवरी तक घर-घर जाकर टीमों ने कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए अभियान चलाया था। इसमें स्कूलों, मोहल्लों में जागरुकता अभियान भी चलाया गया था। जिसमें उरई में तीन, जालौन, कोंच, कालपी में एक एक, माधौगढ़ व नदीगांव में चार चार, रामपुरा में दो, कदौरा में तीन, डकोर में दो, पिंडारी में एक, छिरिया में तीन, बाबई में आठ, कुठौंद में तीन समेत कुल 49 रोगी मिले है।
जिला कुष्ठ परामर्शदादाता डा. मदनमोहन ने बताया कि पांच से कम निशान वाले मरीजों को पीबी की श्रेणी में रखा जाता है। जबकि पांच से ज्यादा निशान वाले मरीजों को एमबी की श्रेणी में चिह्नित किया जाता है। जिला कुष्ठ अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने बताया कि इस समय जिले में 149 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि 49 नए मरीज अभियान के दौरान मिले हैं। विभाग की ओर से कुष्ठ मरीजों के मुफ्त इलाज के अलावा स्थायी दिव्यांगता पर उन्हें ढाई हजार रुपये मासिक पेंशन भी दी जाती है।
इस साल तीन मरीजों की कराई गई सर्जरी
जिला कुष्ठ परामर्शदाता डा. मदनमोहन ने बताया कि इस साल उरई, परासन और कुरौती के तीन मरीजों का सरकारी खर्चे पर मुफ्त इलाज कराया गया। इनकी सर्जरी नैनी (प्रयागराज) स्थित लेप्रोसी हास्पिटल में मुफ्त कराई गई। साथ ही उनके आने जाने का वहन भी सरकारी खर्चे पर हुआ।