जालौन। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन में नगर व क्षेत्र की भूमिका अहम रही है। कारसेवा में जाने वाले 45 रामभक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें चार दिन के लिए जेल भी भेजा गया।
आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले रामभक्त अनिल शिवहरे बताते हैं कि विहिप के तत्कालीन महासचिव व आंदोलन के शीर्ष पुरुष अशोक सिंघल की बैठक नगर में हुई थी। बड़ी माता मंदिर पर अलग अलग रास्तों से रामभक्त एकत्र हुए। जिनमें महिला रामभक्त सुश्री मोहिनी बहिनजी भी थीं। वहीं पर रामभक्तों द्वारा रामकलश पूजन का कार्यक्रम हुआ और रामभक्त अयोध्या में कारसेवा के लिए कूच करने के लिए निकले लेकिन इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को लग गई और मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में पीएसी और पुलिस बल तैनात हो गया। रामभक्त मंदिर से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सभी को न्यायालय में पेश किया गया। जहां से मोहिनी बहिनजी समेत सभी 45 रामभक्तों को जेल भेज दिया गया। 4 दिन जेल में रखने के बाद रामभक्तों को छोड़ा गया। अब भूमि पूजन के साथ एक सपना साकार होता हुआ प्रतीत हो रहा है।
रास्ते में रामभक्तों को पुलिस ने पीटा
जालौन। सुढ़ार सालाबाद के निर्दोष कुमार चतुर्वेदी बताते हैं कि कारसेवा के लिए लोगों में एक प्रकार का जुनून था। लोग कैसे भी अयोध्या में होने वाली कारसेवा में जाना चाहते थे। इसके लिए सभी संभव उपाय किए जा रहे थे। रास्ते में उन्हें उनके साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें व उनके साथियों को पुलिस की पिटाई भी सहनी पड़ी। उसी में उनके एक साथी पैर से भी विकलांग हो गए। उन्हें उनके साथियों के साथ 28 अक्तूबर से 6 नवंबर तक जेल में ही रखा गया। अब जब राममंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन हो रहा है। उन्हें गर्व है कि इस आंदोलन में वह भी साथ रहे।
नोट- राम मंदिर की खबर से संबंधित बातचीत।