स्व. मुमताज अहमद मीरा स्मृति जन सेवा संस्थान के तत्वावधान में बुधवार को
यहां गल्ला मंडी में आयोजित सर्व समाज के सातवें सामूहिक विवाह सम्मेलन में
कुल तीस जोड़े एक दूजे के हो गए। 28 जोड़ों ने जहां निकाह कबूल किया वहीं
दो जोड़े हिंदू रीति रिवाज के साथ अग्नि के सात फेरे लेकर परिणय सूत्र में
बंध गए। सभी जोड़ों को घर-गृहस्थी में काम आने
वाले सामान उपहार में दिए
गए। सपा के तमाम नेताओं ने शादी सम्मेलन में शिरकत कर नव युगलों को
आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री एवं पसमांदा
मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने सामूहिक विवाहों की
परंपरा को आज के समय में मितव्ययी और आपसी मेलजोल बढ़ाने की पहल की सराहना
की। उन्होंने यह भी कहा कि जो
प्यार बुंदेलखंड में मिलता है वह पूरे प्रदेश
में और कहीं नहीं मिला है। गल्ला मंडी में आयोजित इस शादी सम्मेलन में कुल
तीस शादियां हुईं जिनमें 28 मुस्लिम और दो हिंदू समाज के जोड़ों नेे साथ
जीने मरने की कसमें लीं। पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन
ने कहा कि सामूहिक विवाह की परंपरा की शुरुआत बुंदेलखंड से ही हुई और
प्रदेश के
कई जिलों में इस परंपरा को आत्मसात कर फिजूल खर्ची को रोका जा
रहा है। उन्होंने कहा कि राजनैतिक दलों ने पिछड़े मुस्लिमों को आज तक कुछ
नहीं दिया जिसके कारण हम और भी पिछड़ गए। आयोजक संस्था के अध्यक्ष आजाद
अहमद मीरा ने बताया कि वह प्रति वर्ष ऐसे शादी सम्मेलन आयोजित करते हैं
ताकि गरीब बेटियों के हाथ पीले हो सकें। संचालन
महबूब मंसूरी ने किया। आभार
आयोजक आजाद मीरा ने जताया। सम्मेलन में युवा समाजसेवी विकास बाबा द्वारा
21 हजार रुपये की फौरी इमदाद शादी आयोजकों को दी गई। क्रय विक्रय समिति के
अध्यक्ष हरिश्चंद्र तिवारी, हाजी सेठ नसरूल्ला,
अहमदखां मंसूरी, यूसुफ
राईन, पप्पू मंसूरी, माजाउल्लाखां गौरी, हाजी मुबीन अंसारी, मुन्ना कुरैशी,
अकबर अंसारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे। विदाई के वक्त सभी जोड़ों को
पर्याप्त उपहार भी भेंट किए गए। समागम में यूपी और एमपी के अलावा दूरदराज
के भी लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
ये बने एक दूजे के हमसफर..
शादी
सम्मेलन में जाहिद (हमीरपुर) ने आसमां (कदौरा), मोहम्मद अहसान (कुकरगांव)
ने शबाना (डाढी), आजाद (पुलगाना) ने सुल्ताना (चिरगांव), शेख अशरफ
(अब्दुल्लापुर) ने नगीना (इमिलिया), बरकत (एट) ने आशिया (इमिलिया), शहीद
(दूल्हागंज) ने आलिया (कोंच), आसिफ (सामी) ने भूरी (कोंच), इम्तियाज (सिकरी
जागीर भिंड) ने रेश्मा (एरच),
अनीस (मगरौरा) ने जलीसा (ब्यौना), जावेद
(ब्यौना) ने हदीसा (ब्यौना), मोहम्मद बकरूद (जैसारी) ने काजोल (लौना),
रानूखां (चितगुवां) ने कल्लो (कोंच), वकील अहमद (रूरा) ने सितारा (पूंछ),
शिखावत खान (अमरौख) ने नफ्फो (बरौली), वकीलखां (राधापुर) ने जूली (हिनौना),
हनीफ (चंद्रौल) ने आस्ताना (ब्यौना), शाकिर (कोंच) ने रूबीना (भांडेर),
सलीम
(बरूआ सागर) ने जीनत (एट), फिरोज (बिजपुर) ने रोशनी (नदीगांव), इरशाद
(कोंच) ने जम्मो (भांडेर), मुबारक (मगरौली) ने जूली (कूंड़ा), शाह आलम
(अब्दुल्लापुर) ने रूबीना (कुरकुरू), इदरीश (अटरेटा) ने नसरीन (नदीगांव),
काजिम (चिल्ली) ने शकीला (भिटारा), इख्लाश (रामपुरा) ने रेहाना (अंतराम),
आस मोहम्मद चांदनी ने अंजुम (बघौरा धौरी),
शहजाद (लहार) ने रूबीना (भिंड)
के अलावा मोहम्मद सादिक (ब्यौना) तथा मोहम्मद बसीम (ललितपुर) ने जहां निकाह
कबूल कर एक दूसरे को अपना जीवनसाथी बनाया। वहीं, कृष्णा कोंच ने
गायत्रीदेवी भांडेर व हिमांशु कोंच ने ज्योति गोरखपुर के साथ अग्नि के
गिर्द सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में प्रवेश किया।