उरई। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद शहरों में काम करने वाले करीब 2300 लोग जिले में आए। रामपुरा, ऊमरी, शंकरपुर चौकी, माधौगढ़ जैसे क्षेत्रों में भी लोग लौटकर आए। राठ रोड ओवरब्रिज पर भी करीब एक हजार लोग राठ, महोबा, बांदा, चित्रकूट आदि स्थानों के लिए गए। बाहर से आए लोगों की ओवरब्रिज के पास ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। कुछ लोग जिला अस्पताल भी जांच कराने पहुंचे। इस दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। कुछ समाजसेवियों ने बाहर से आने वाले लोगों के लिए लंच पैकेट की इंतजाम किया।
एआरएम केएन चौधरी का कहना है कि सुबह आठ बजे से पांच बजे तक करीब दस रोडवेज की बसों से बाहर से आए लोगों को राठ की ओर रवाना किया गया। जिले की सीमाओं पर भी रोडवेज बसें भेजी जा रही है, उन्हें भी गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। बाहर से आए लोगों की मदद के लिए कुछ लोगों ने अपने ट्रैक्टर और निजी ट्रक भी लगा दिए हैं, ताकि वे अपने घरों तक पहुंच जाए। इतने बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के आ जाने से प्रशासन के हाथ पांव फूले रहे। सीओ पुलिस बल लेकर मौके पर डटे रहे। सीएमएस डा. एके सक्सेना का कहना है कि जिला अस्पताल में भी कई बाहर से लौटे लोग जांच कराने पहुंचे, लेकिन उनमें से कोई ऐसा नहीं था, जिसे आइसोलेट किया जा सके। हालांकि सबसे कहा गया है कि वे अपने ही घरों में रहे। बाहर न निकले और लोगों से ज्यादा मुलाकात आदि न करें।
सामाजिक दूरी बनाकर की गई जांच
रामपुरा। सीएचसी रामपुरा में एक सैकड़ा लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। रामपुरा इंस्पेक्टर आरके सिंह ने दिल्ली, गुजरात से आ रही चार गाड़ियां को रोककर अस्पताल पहुंचाया और सभी की जांच कराई। जांच के बाद ही लोगों को घर जाने दिया गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ अमित सिंह ने बताया कि रविवार को लगभग एक सैकड़ा लोग जांच कराने आए। सभी लोगों की दूर-दूर खड़ा रखकर जांच की गई। हालांकि जांच में कोई संदिग्ध नहीं मिला। इसके अलावा आरआरटी ने जमालपुरा में 77, चंदावली में 20, हुसेपुरा जागीर में 9, राठौरनपुरा में 13, किशनपुरा में 8, नरौल में 24 लोगों की स्क्रीनिंग की।
बाहरी लोगों को विद्यालय में रुकवाया
माधौगढ़। मजदूरी के लिए शहरों में गए मजदूरों के सामने घर वापसी भी मुसीबत बन गई है। गांव के लोग बाहर से आए लोगों को गांव के अंदर आने देने के लिए तैयार नही है। प्रधानों ने गांव के बाहर विद्यालयों में ठहरने की व्यवस्था कर दी है। कोतवाली थाना क्षेत्र के गांव भगवानपुरा निवासी देवेंद्र, जंगबहादुर, भूपेंद्र हैदलपुरा, प्रवेश कुरौंती, सुरेंद्र, रोशन, जितेंद्र गोपालपुरा कहना है कि दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा में मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे। लॉकडाउन होने से बिना कामकाज के वहां रहना मुश्किल था। बस में बैठकर घर आ गए। चिकित्सा प्रभारी डा. विनोद राजपूत का कहना है कि लगभग ढाई सैकड़ा मजदूरों की जांच की जा रही है। किसी में भी कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। सबको घर भेज दिया गया है।
वाहन न मिलने से पैदल पहुंचे लोग
कोंच। कोरोना वायरस को लेकर ऐसे तमाम परिवार रविवार को मारकंडेयश्वर तिराहे, पहाड़गांव चुंगी और पंचानन चौराहे पर बैठे मिले जो फिलहाल एट से पैदल चल कर कोंच पहुंचे थे और इंतजार कर रहे थे कि आगे कोई साधन मिले तो घरों को जाया जाए क्योंकि अब वह थक चुके थे। इनमें ज्यादातर लोग दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान आदि जगहों से आने वाले हैं।
सरकारी स्कूल में बनाया ठिकाना
कोंच। ग्राम सतोह से एक अच्छी खबर आई है, बाहर से अपने घरों को लौटे परिवारों को गांव से अलग थलग पूर्व माध्यमिक विद्यालय में ठहराया गया है ताकि उन्हें आइसोलेशन में रखा जा सके। दूसरे प्रांतों में रोजी कमाने गए लोग लॉक डाउन की बजह से अपने घरों को लौट रहे हैं और ग्रामीणों में इस बात को लेकर भय व्याप्त है कि कहीं इनमें कोई संक्रमित हुआ तो पूरा गांव खतरे में पड़ सकता है। ग्राम प्रधान सतोह अजयकुमार सिंह ने बताया है, उनके गांव में भी लगभग दो दर्जन लोग गैर प्रांतों से लौटे हैं जिन्हें समझा बुझाकर सरकारी स्कूल में ठहरा दिया गया है और गांव वालों तथा उनके परिवारों को भी उनसे दूर रहने के लिए कह दिया गया है।
शहर के कोंच बस स्टैंड पर बाहर से आए लोगों को बस के पास लगी भीड़- फोटो : ORAI
अपने ट्रक से भरकर लोगों को घर पहुंचाने में मदद करता सोनू यादव- फोटो : ORAI
राठ रोड स्थित बाहर से आए लोगों को भोजन वितरित कर आते समाजसेवी- फोटो : ORAI
राठ रोड ओवर ब्रिज पर यात्रियों को ले जाने के लिए खड़ी रोडवेज बस- फोटो : ORAI