उरई। बीमा कराने के बाद उसकी तीन किश्तें जमा कर पालिसी सरेंडर करने पर बीमा राशि देने में आनाकानी करने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने नाराजगी जताकर बीमा कंपनी को पॉलिसी धारक को बीमा राशि के अलावा नौ प्रतिशत ब्याज देने का निर्देश दिया।
कोंच तहसील के अंडा निवासी वृंदावन पुत्र मथुरा ने बजाज इलियांज इंश्योरेंस कंपनी से 28 सितंबर 2006 को एक पालिसी ली थी। इसमें पचास हजार रुपये प्रतिवर्ष दस साल तक जमा करना था। पॉलिसी धारक को बताया गया था कि यह पॉलिसी तीन साल बाद सरेंडर की जा सकती है और उस समय के अनुसार उसके पालिसी का बाजार रेट पर मिल रहा धन मिलेगा।
पालिसी धारक ने तीन किश्तें यानी डेढ़ लाख रुपये जमा कर दिए। 28 सितंबर 2012 को उसने पालिसी बांड सरेंडर करने बाद बांड वैल्यू के मुताबिक धन की मांग की पर बीमा कंपनी ने आनाकानी शुरू कर दी। उसे फंड वैल्यू के अनुसार उसकी धनराशि डेढ़ लाख जमा करने के बाद 72 हजार बढ़ी थी, लिहाजा उसे फंड वैल्यू के अनुसार 2 लाख 22 हजार रुपये की मांग की पर बीमा कंपनी ने आनाकानी की तो 31 जनवरी 2017 को उसने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष व न्यायाधीश जेके पांडेय व न्यायिक सदस्य रामबाबू निषाद ने इसमें बीमा कंपनी की लापरवाही मानते हुए कंपनी को आदेश दिया कि पालिसी धारक को 2 लाख 22 हजार रुपये का भुगतान किया जाए। साथ ही 28 सितंबर 2012 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत सालाना का ब्याज भी दिया जाए।