जालौन। जब-जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। यह प्रवचन ग्राम दौलतपुरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भागवताचार्य महामंडलेश्वर अतुलेशानंदजी महाराज ने कही।
क्षेत्रीय ग्राम दौलतपुरा में आयोजित भागवत में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा व्यास अतुलेशानंदजी महाराज ने कहा कि गोपियों को भगवान इतने प्रिय थे कि वे जानबूझ कर दरवाजे खुला छोड़ देतीं थीं जिससे कृष्ण को दही चुराने का मौका मिले। फिर चोरी करते हुए कृष्ण को पकड़ कर माता यशोदा के पास ले जाती थीं। इसके पीछे उनका उद्देश्य बालक कृष्ण की मनोहारी छवि को निहारना होता था।
उन्होंने बताया कि कृष्ण हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। इस दौरान परीक्षित फूलारानी, ख्यालीदास महाराज हंस, अमित गोस्वामी, शैलेंद्र भार्गव, नीरज शास्त्री, कामिनी, दयाशंकर, निखिल, विपिन, कमलेश, काजोल, दीनदयाल, बालाराम, बृजकिशोर, दिग्विजय सिंह, लक्ष्मीकांत, रमाकांत, जितेंद्र, रविंद्र, अरविंद्र, मानवेंद्र, शैलेंद्र, अनुज, छोटू, गोलू आदि मौजूद रहे।