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पुलिस के लिए नहीं, स्वयं के लिए पहनें हेलमेट

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उरई। अमर उजाला के महाभियान अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के अंतर्गत राजेंद्र नगर स्थित रामजी लाल पांडे इंटर कालेज में पुलिस की पाठशाला आयोजित की गई। इसमें सीओ सिटी संतोष कुमार ने छात्राओं को न सिर्फ कानून की जानकारी दी, बल्कि अपराध नियंत्रण और यातायात व्यवस्था से जुड़े बच्चों के सवालों का जवाब भी दिया। सीओ ने कहा कि अक्सर दो पहिया वाहन सवार पुलिस से बचने के लिए हेलमेट सिर में फंसा लेते हैं, और जब कभी दुर्घटना होती है तो गंभीर हालत में घायल होकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट की बेल्ट जरूर बांधे। याद रखें कि वे हेलमेट पुलिस से बचने के लिए अपनी जान बचाने के लिए पहन रहे हैं। इसी कड़ी में छात्राओं ने अपराजिता की शपथ भी ली।
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कालेज की छात्राओं ने सीओ से अपराध संबंधी सवाल पूछे। छात्राओं ने पूछा पुलिस चौराहे पर रिश्वत लेकर यातायात नियम तोड़ने वालों को क्यों छोड़ देती है। पुलिस सिर्फ प्रभावशाली और पैसे वालों की ही क्यों सुनती है। पुलिस वाले स्वयं चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट नहीं बांधते और बाइक चलाते वक्त हेलमेट भी नहीं पहनते हैं। इसके अलावा पुलिस वाले अपने घर परिवार को समय भी क्यों नहीं देते है। इस तरह एक के बाद एक कई सवाल छात्राओं ने सीओ से किए।

इस पर सीओ ने कहा कि जिस तरह पांचों उंगलियां एक समान नहीं होती, ठीक उसी तरह सभी पुलिसकर्मी भी एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ अच्छे तो कुछ खराब भी है। लिहाजा पुलिस को लेकर कभी कोई गलत छवि दिमाग में नहीं रखनी चाहिए। कहा कि जो शोहदे बाइक चलाकर छात्राओं से छेड़खानी करते हैं, उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई तो करती है। साथ ही ऐसे लड़कों के परिजनों को भी देखना चाहिए कि आखिर उनका लाडला बाइक लेकर जा कहां रहा है।
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सीओ ने छात्राओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घर पर अभिभावकों से कहें कि यदि उनका भाई बाइक से कोचिंग कालेज जाता है तो उसे हरगिज न जाने दें। छात्राओं ने स्टेशन रोड पर शोहदों की शिकायत की, तो सीओ ने भरोसा दिलाया कि पुलिस की ड्यूटी लगाकर उस पर काबू किया जाएगा। स्कूल प्रबंधक दीपक पांडे ने भी ‘अमर उजाला’ के प्रयास की सराहना करते हुए कहा यह सिर्फ समाचारों में ही नहीं, बल्कि समाजसेवा के कार्यों में भी आगे रहता है। इस मौके पर उरई कोतवाल शिवगोपाल, प्रधानाचार्या सोरज, रिचा, रजनी, आकांक्षा, योगेंद्र, मनीष, कुलदीप, श्वेता, वसुंधरा, आलोक, विवेक आदि मौजूद रहे।


सीओ ने बताया कि जब वे पढ़ाई कर रहे थे, उन दिनों उनके गांव के थाने से रसोई गैस सिलिंडर बंटा करते थे। एक बार सर्दियों में उन्हें थाने की पुलिस के कारण दो दिनों तक परेशान होना पड़ा और सिलिंडर नहीं मिला। फिर भी उन्होंने पुलिस की नौकरी ज्वाइन की, क्योंकि किसी एक पुलिसकर्मी की गलती के कारण हम पूरे महकमे को गलत नहीं मान सकते हैं।
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