उरई। जिला अस्पताल में इलाज के साथ साथ मरीजों को दवा लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि मात्र दो काउंटर होने की वजह से मरीजों व तीमारदारों को घंटों लाइनों में लग कर दवा लेते पड़ती है। उसमें भी जब उनका नंबर आता है तो मरीज को आधी अधूरी दवाएं मिलती हैं। जिससे आएदिन दवा कांउटर पर मरीजों व काउंटर पर बैठे कर्मचारियों में तीखी नोकझोंक होती रहती है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का समान करना पड़ता है।
बता दें कि जिला अस्पताल की ओपीडी का समय आठ से दो बजे तक है। यहां रोजाना करीब 1300 से लेकर 1800 तक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इतने मरीजों को दवा बांटने के लिए अस्पताल में सिर्फ दो दवा काउंटर बनाए गए है। इनमें इतनी लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं कि मरीज व तीमारदार लाइनें देखकर ही दवा मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं।
वहीं आएदिन काउंटरों पर बैठे कर्मचारी मरीजों से अभद्रता करते हैं। गुरुवार को दवा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे मरीज मनीष, राघवेंद्र, श्याम बाबा, विनय तिवारी आदि का कहना है कि अस्पताल में दवा लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में एक महिला व पुरुष काउंटर बने है। नियमानुसार अगर महिला मरीज है तो उन्हें महिला काउंटर की लाइन में लगकर दवा लेनी होगी और अगर पुरुष मरीज को पुरुष काउंटर से दवा मिलेगी।
ऐसे में अगर आपके साथ महिला मरीज है और वह लाइन में लगने की स्थिति में नहीं है तो दोनों काउंटर के कर्मचारी चक्कर लगवाते है और मरीज की स्थिति बताने पर भी दवा नहीं देते। उनका आरोप है कि कई शिकायतों के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने न तो दवा काउंटरों की संख्या बढ़ाई और न ही काउंटर पर तैनात कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की। मामले को लेकर सीएमओ अल्पना बरतारिया का कहना है कि अभी उनके पास दवा काउंटर बढ़ाने को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है अगर परेशानी होगी तो काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, इसके साथ ही कर्मचारियों की अभद्रता की भी जांच कराई जाएगी।