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किसी ने सराहा तो कोई बता रहा लॉलीपाप

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उरई। चुनाव के चंद माह पहले ही सही लेकिन सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को जनप्रतिनिधि और विशेषतौर पर युवा सवर्ण ने सराहा है।
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लोगों का कहना है कि अर्से बाद पहली बार किसी सरकार ने सवर्णों की सुध ली है। इससे देश के लाखों जरूरतमंद सवर्ण युवाओं का भविष्य सुधरेगा। जिससे उनकी परिवार की आर्थिक दशा में सुधार आएगा और घरों में भी खुशहाली दिखाई देगी। सवर्णों को काफी समय बाद सरकार से कुछ मिला है। वहीं विरोधी दलों के नेताओं ने इसे चुनावी लॉलीपाप बताया हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला तीन राज्यों में मिली करारी हार का परिणाम है।

माधौगढ़ के विधायक मूलचंद्र निरंजन का कहना है कि केंद्र सरकार ने सवर्णों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला किया है। इससे समाज में समानता आएगी। इसके लिए केंद्र की सरकार वाकई बधाई की पात्र है।
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उरई नया रामनगर निवासी बीटीसी कर रही सोनाली मिश्रा का कहना है कि अभी उन्हें पूरे निर्णय की जानकारी तो नहीं है लेकिन यदि सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिल रहा है तो जरुरतमंद सवर्णों को इससे अधिक और क्या चाहिए।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार सिर्फ लॉलीपाप न दिखाए, संविधान में संशोधन करके अपने फैसले को लागू कराए। साढ़े चार साल तक भाजपा ने सिर्फ कोरे वायदे ही किए हैं।

सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल दादी का कहना है कि तीन राज्यों में मिली हार के बाद भाजपा सकते में है। वह आरक्षण से चमत्कार की आस लगाए है लेकिन 2019 में ऐसा कोई चमत्कार होने वाला नहीं है। भाजपा की हार तय है।
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