उरई। गोशालाओं व गोवंश आश्रय स्थल में भूख प्यास से जूझ रहे मवेशियों को अब दाना पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। इसके लिए शासन ने जिले में डेढ़ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। बजट आवंटन की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को दी गई है।
बजट के आवंटन की शुरूआत नगर पालिका व नगर पंचायत से की जाएगी। नगर पंचायतों के आवंटन के बाद ब्लाक स्तर की गोशालाओं को बजट भेजा जाएगा। इसके लिए विभाग ने नगर पंचायतों का सर्वे शुरू कर दिया है। जल्द ही आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों ती मानें तो यह धनराशि बंद पड़ी गोशालाओं के लिए भी संजीवनी का काम करेगी।
बता दें जिले में किसान अन्ना समस्या से बुरी तरह परेशान है। आएदिन अन्ना मवेशी जिले के किसी न किसी क्षेत्र में किसानों की फसलों को चट कर रहे हैं। जिससे किसान की मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है। आक्रोशित किसानों ने अधूरी पड़ी गोशालाओं व अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल में जानवरों को बंद तो कर दिया, लेकिन खाने पीने का इंतजाम न होने से इनमें अन्ना दम तोड़ रहे हैं।
वहीं बजट न होने की वजह से जिला प्रशासन भी चारा पानी के लिए लोगों से सहयोग मांग व चंदा कर काम चला रहा था। इससे गोशालाओं में जानवरों की स्थिति ठीक नहीं हो पा रही थी। इस समस्या से निजात दिलाते के लिए शासन ने जिले के आश्रय स्थल व गोशालाओं मेें बंद गोवंशों के चारे पानी के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का बजट दिया है। शासन ने बजट वितरण की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को दी है। बजट मिलते ही पशुपालन विभाग ने बजट वितरण के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही गोशालाओं को उनमें उपस्थित गोशंव के हिसाब से बजट का आवंटन किया जाएगा।
किसान दिनेश दिवाकर का कहना है कि शासन ने गोशालाओं को बनवाने के लिए तो खूब बजट दिया था, लेकिन उनमें रह रहे जानवरों के चारा पानी के लिए कोई बजट नहीं दिया था। इससे संचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अभी तक संचालक आपसी सहयोग व ग्रामीणों से चंदा कर गोशाला में चारा पानी का इंतजाम कर रहे थे। जिससे उन्हें तमाम तरह की समस्या से जूझना पड़ रहा था। बजट मिलने से इन गोशालाओं की सूरत बदलेगी।
प्रधान संघ के नेता अमित इतिहास वोहदपुरा की गोशाला में बीते माह दो बार जानवरों की मौत हुई थी। इसके पीछे भी अन्ना मवेशियों को चारा पानी न दिए जाने की बात सामने आई थी। इसी तरह कदौरा में भी स्थित गोशाला में मवेशियों की मौत हुई थी। जबकि कालपी की आलमपुर गोशाला तो चारे पानी के कारण ही नहीं चल पा रही थी। आटा की गोशाला से छूटे भूखे प्यासे मवेशी भी कई बार आसपास के किसानों की फसलों को चट कर चुके हैं।
पशु चिकित्साधिकारी आरपी सिंह गौर ने कहा कि चारों नगर पालिका व छह नगर पंचायतों में अन्ना की गणना को लेकर बेसिक डाटा मिल गया है। सभी नगर पालिका व पंचायतों में सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्वे पूर्ण होते ही आवंटन किया जाएगा। इसके साथ ब्लाक बार भी सूची तैयार की जा रही है। जहां पर जितने मवेशी होंगे, उसी आधार पर गोशालाओं को धन आवंटित किया जाएगा। इसमें सबसे पहले नगर पंचायतों की गोशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।