उरई। गोशालाओं को 10 जनवरी तक चालू कराने का फरमान असर दिखाने लगा है। सरकारी मशीनरी तो तेज हुई ही है, साथ ही ग्रामीणों ने भी एक कदम आगे बढ़ाकर अन्ना मवेशियों की समस्या से निजात पाने का प्रयास शुरू कर दिया है। एक ओर अधिकारी जहां समस्या के निदान के लिए बैठकें कर रणनीति बनाकर हर हाल में निर्माणाधीन व बंद पड़ी गोशालाओं को चालू कराने की बात कह रहे हैं वहीं दूसरी ओर किसान भी अस्थायी गोशालाएं बनाने के लिए जुट गए हैं। जिससे लग रहा है कि जल्द ही जनपद को अन्ना मवेशियों से पूरी तरह छुटकारा भले ही न मिले लेकिन कुछ राहत जरूर महसूस होगी।
अन्ना मवेशियों की समस्या से पूरी तरह से निपटने के लिए प्रशासन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। सोमवार को एडीएम प्रमिल कुमार और सीडीओ की अगुवाई में कलक्ट्रेट में बैठक हुई। इसमें अधिकारियों ने मौजूद सभी एसडीएम व बीडीओ से दो टूक शब्दों में कहा कि गांव-गांव जाकर किसानों से बात करें और 10 जनवरी तक हर हाल में अन्ना मवेशियों को गोशालाओं में पहुंचाएं।
सीडीओ एबी सिंह ने बताया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रशासन की 246 गोशालाएं पूरी तरह से तैयार भी हो जाएंगी, जहां पर इन अन्ना मवेशियों को रखा जा सकता है। इसके अलावा त्रिस्तरीय कमेटी बनाकर शहर से लेकर ग्रामीण स्तर व्यर्थ पड़ी सरकारी जमीनों को चिह्नित किया जाएगा, ताकि वहां 20 जनवरी तक अस्थाई गोशालाएं खोलकर किसानों को अन्ना मवेशियों से राहत दिलाई जा सके। इसेक लिए अधिकारी ग्राम प्रधानों से बात कर जल्द से जल्द काम शुरू कर दें। इन कमेटियों की निगरानी डीएम, एसडीएम और बीडीओ करेंगे।
सिरसाकलार/सरावन प्रतिनिधि के अनुसार, सरावन क्षेत्र में करीब डेढ़ से दो सौ अन्ना मवेशी किसानों की परेशानी का कारण बने हुए हैं। जिनसे निजात पाने के लिए अभी तक किसान सिर्फ उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक हांका करते थे। समस्या के निदान के लिए क्षेत्र के प्रगतिशील किसान अशोक सिंह मडोरी ने पहल की और अपने बाग में ही अस्थायी गोशाला तैयार कराई हं।
इसमें किसानों के लिए छाया से लेकर चारे पानी तक की व्यवस्था की गई है। शाम के वक्त मवेशी इसी अस्थाई गोशाला में रखे जाते हैं। किसान भी रात खेतों में गुजारने के बजाए घरों में चैन से सो पा रहे हैं। इसी तरह सिरसाकलार के ब्लाक महेवा के गांव मलथुआ के किसान समस्या से निपटने के लिए आगे आए और प्रधान राजीव पांडे की मदद से मैदान के चारों ओर तार बांधकर अस्थायी गोशाला शुरू की गई। प्रधान ने बताया कि रात की रखवाली के अलावा दिन के वक्त भी इन अन्ना मवेशियों को चराने के लिए चरवाहों की व्यवस्था की जाएगी।
कोंच प्रतिनिधि के अनुसार, एसडीएम गुलाब सिंह की पहल पर हाटा में सुरही चौकी की पुरानी जीर्ण शीर्ण इमारत को गायों का आश्रय स्थल बनाया गया है। जहां तकरीबन सैकड़ा भर गायों का बसेरा है। उन गायों के लिए भोजन पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो रही है। जिसमें नगर के तमाम समाजसेवी और गो प्रेमी उनके लिए चारे भूसे का प्रबंध कर रहे हैं। लेखपाल सदर नरेंद्र सिंह सुबह शाम जाकर निगरानी करते हैं।
श्री महाराजा अग्रसेन जागरूकता महिला मंडल की महिलाएं भी मंडल की दूसरी वर्षगांठ पर इस गोशाला में जाकर मवेशियों को भूसा एवं आटा खिला रही हैं। इतना ही नहीं मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए उन पर झूलें डालीं। रश्मि, अर्चना, मीनू, मंजू अग्रवाल, नीलू गिरवासिया, सविता, सुनीता अग्रवाल, रुचि अग्रवाल, सोनाली, मनीषा, किरण, चारु, सोनू, अनीता, दीक्षा, निशी, अर्चना गिरवासिया, एकता आदि महिलाएं मवेशियों की सेवा में जुटी हुई है।