उरई (जालौन)। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से सांठगांठ कर 18 मीटर की पुलिया को 21 मीटर का दिखाते हुए मेरठ की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एनएचएआई से करोड़ों के काम हासिल कर लिया। इस फर्जीबाड़े का खुलासा तब हुआ जब एनएचएआई की शिकायत पर वर्तमान के पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड तीन के अधिशाषी अभियंता ने मामले की जांच की, जिसमें पुलिया का निर्माण कार्य लगभग 18 मीटर ही पाया गया। यह मामला है हमीरपुर कालपी राजमार्ग पर बनी पुलिया का है, जिसका निर्माण कार्य सपा के शासनकाल में करीब चार साल पहले किया गया था। फर्जीबाड़े का खुलासा होते ही महकमे में हड़कंप मचा है।
अधिशाषी अभियंता वीके राय का कहना है कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट एनएचएआई के साथ साथ झांसी मंडल के अधिकारियों को भेज दी है। लिहाजा फर्जीबाड़ा करने के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होना भी तय है। बता दें कि सपा शासन के वर्ष 2013 में मैसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन मेरठ की कंपनी ने हमीरपुर कालपी राजमार्ग 91 का लगभग 45 किलोमीटर का निर्माण कार्य कराया था। निर्माण के दौरान कंपनी ने जोल्हूपुर क्रासिंग के पास जोधर नाले पर करीब 18.25 मीटर पुल का निर्माण कार्य किया था। निर्माण कार्य के बाद कंपनी के ठेकेदार ने एनचएआई में टेंडर हासिल करने के लिए जिले के अधिकारियों से सांठगंाठ कर 18.25 मीटर के छोटे पुल को 21 मीटर का बड़ा पुल बताकर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करा लिया।
जिसके आधार पर कंपनी ने एनएचएआई से करोड़ों के काम भी प्राप्त किए। हैरत की बात तो यह है हमीरपुर कालपी राजमार्ग पर बनी एक पुलिया के एक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कृष्णा कंस्ट्रक्शन एनएचएआई से लगातार पिछले तीन सालों से ठेके ले रही थी और किसी को इस फर्जीबाड़े की भनक तक नहीं थी। हाल ही में जब एनएचएआई में मामले की शिकायत की गई तो वहां से जांच के निर्देश सीधे पीडब्ल्यूूडी विभाग को मिले। इस पर अधिशाषी अभियंता राय ने 13 दिसंबर को स्वयं ही मौके पर पुलिया का निरीक्षण किया तो उनकी भी आंखें फटी की फटी रह गई, क्योंकि पुलिया पर उम्मीदों के प्रदेश का बोर्ड तो लगा था पर जिस पुलिया को कागजों में 21 मीटर का दिखाया गया था, उसकी वास्तविक लंबाई 18.25 मीटर ही थी।
पुलिया के निर्माण में करीब 18 करोड़ का खर्च आया था। इसके बाद अधिशाषी अभियंता ने 19 दिसंबर को अपनी जांच रिपोर्ट न सिर्फ एनएचएआई के अधिकारियों को ही भेजी बल्कि झांसी मंडल के अधिकारियों को भी उक्त फर्जीबाड़े से अवगत कराया। अधिशाषी अभियंता राय का कहना है कि 18 मीटर की पुलिया पर 21 मीटर का प्रमाणपत्र कैसे जारी हुआ और इसमें किन अधिकारियों व कर्मचारियों की भागीदारी रही, इस बारे में अभी वे कुछ नहीं कह सकते हैं। फिलहाल अपनी रिपोर्ट भेज दी है, हो सकता है कि मामले की अब विभागीय जांच भी कराई जाए, ताकि फर्जीबाड़ा करने वालों का पता चल सके और कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई हो सके।
कंपनियों की कमाई का जरिया बनते फर्जी प्रमाणपत्र
इस फर्जीबाड़े के संदर्भ में जब कुछ ठेकेदारों से बात की गई तो पता चला कि बड़े काम पाने के लिए ऐसे अनुभव प्रमाणपत्र कंपनियों के लिए बहुत जरूरी होते हैं। जिसके आधार पर ही उन्हें विभिन्न विभागों से बड़े बड़े काम बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। उक्त मामले में यही हुआ होगा, 21 मीटर की पुलिया का निर्माण कार्य दिखाकर कंपनी ने न जाने कितने करोड़ों के काम एनएचएआई से हासिल कर लिए होंगे।
1000 करोड़ के फर्जीबाड़े का अनुमान
विभागीय सूत्रों के अनुुसार पुलिया निर्माण कार्य के बाद से करीब 1000 करोड़ का फर्जीबाड़ा एनएचएआई से होने की आशंका है। अब जब मामले की जांच पड़ताल हो रही है तो कृष्णा कंस्ट्रक्शन के उन कार्यों पर भी नजर दौड़ाई जाएगी, जिन्हें कंपनी ने एनएचएआई से हासिल किया है।
पुलिया का लगा निर्माण कार्य का बोर्ड- फोटो : ORAI