कुठौंद (जालौन)। नोएडा बस हादसे में जान गंवाने वाले आठ लोगों में से छह लोग जालौन जिले के थे। इनमें से एक विश्वनाथ तिवारी बेटे के बुलावे पर दिल्ली जा रहे थे। पड़ोसियों के लोगों ने बताया कि विश्वनाथ को आंखों की बीमारी थी और उनका एम्स में इलाज चल रहा था।
आंखों के चेकअप के लिए नोएडा की प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले बेटे बौरे तिवारी ने पिता को बुलाया था। विश्वनाथ तिवारी ने अपने बेटे बहू से वादा किया था कि होली के बाद जब उन्हें आंखों का चेकअप कराना होगा तो वे नोएडा जरूर आएंगे। परिवार से मिले हुए काफी दिन हो गए हैं। यही वजह थी कि विश्वनाथ का छोटा बेटा पंकज और बड़े बेटे की बेटी आराधना भी परिवार से मिलने की खुशी लेकर घर से निकले थे। किसी को क्या मालूम था कि हादसे में विश्वनाथ अपनी जान गंवा देंगे और पंकज व आराधना घायल हो जाएंगे और परिवार से मिलने की खुशियां इस तरह मातम में तब्दील हो जाएंगी। देर रात तक विश्वनाथ के घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ लगी रही। सभी की नजर घर से गए परिजनों के लौटने का इंतजार कर रही थी।
होली की खुशियां मनाकर लौट रहा था अरुण
अभी कुछ ही दिन पहले की बात है जब नोएडा में मजदूरी करने वाला अरुण अपनी पत्नी सीमा को लेकर होली पर कुठौंद अपने घर आया था। अरुण ने अपने परिवार में किसान पिता गया प्रसाद व छोटे भाइयों के साथ मिलकर होली भी मनाई थी। गुरुवार की शाम ही अरुण और सीमा वापस अपने घर जा रहे थे। नहीं मालूम था कि यह उनकी आखिरी होली साबित होगी। अरुण की हादसे में मौत हो गई और सीमा की भी हालत नाजुक बताई जा रही है। अरुण के बड़े भाई की करीब सात आठ साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। हादसे से तो मानो पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ सा टूट पड़ा हो।