झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण को लेकर कई ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। मार्ग डायवर्ट कर दिए गए हैं। इससे दैनिक यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। यात्रियों का कहना है कि कम से कम इंटरसिटी ट्रेन चलाई जानी चाहिए थी।
झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक पर 15 दिसंबर से ही यातायात गड़बड़ा हुआ है। पहले झांसी कानपुर व झांसी लखनऊ पैसेंजर, झांसी लखनऊ इंटरसिटी ट्रेन को 15 फरवरी तक के लिए कोहरे के चलते निरस्त किया गया था।
अभी 15 फरवरी नहीं आई थी, इसके पहले ही झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक के दुरुस्तीकरण को लेकर 15 से 28 फरवरी तक इस रुट से निकलने वाली दिन की सभी ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया है।
इसके चलते सुबह सात बजे लोकमान्य तिलक से गोरखपुर जाने वाली संत कबीरनगर एक्सप्रेस जो सुबह सात बजे जाती है, वहीं निकलती है। इसके बाद झांसी की ओर से शाम को साबरमती ही आती है। इस बीच दिन भी स्टेशन पर सन्नाटा छाया रहता है।
रेलवे स्टेशन के कर्मचारी बताते है कि आमतौर पर बुकिंग व आरक्षण से रेलवे की सवा दो लाख से ढाई लाख की आमदनी होती है। ट्रेनों के निरस्त हो जाने के कारण यह आय घट गई है।
अब 70 हजार से एक लाख तक का घाटा हो रहा है। बमुश्किल डेढ़ लाख की ही आमदनी हो रही है। वहीं रिजर्वेशन काउंटर पर एक पाली में जो डेढ़ सौ फार्म भरे जाते थे, अब उनकी भी संख्या घट गई है। अब बमुश्किल 100 से 110 यात्री ही आरक्षण के लिए आ रहे हैं।
दो महीने से अधिक समय से ट्रेनों के संचालन में कमी के कारण रोडवेज की आय में इजाफा हो गया है। रोडवेज के एआरएम अपराजित श्रीवास्तव का कहना है कि यात्रियों की संख्या में 25 फीसदी की इजाफा हुआ है, वहीं आय भी 20 फीसद बढ़ गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि कालपी के जाम के कारण कानपुर तरफ के ट्रैफिक में दिक्कत हो रही है।
ट्रेनों के निरस्त व डायवर्ट होने व बसों में यात्रियों की संख्या में यकायक बढ़ोतरी और ज्यादा किराये होने के चलते डग्गामार वाहनों की चांदी हो गई है।
डग्गामार वाहन के संचालक ने बताया कि कालपी के जाम में कई बार रोडवेज बसें फंस जाती है, लेकिन वे शार्टकट रास्ते से गाड़ियां निकाल लेते है। ट्रेनों की आवाजाही बंद होने से उनकी आमदनी में इजाफा हुआ है। कम किराये के चक्कर में कई यात्री डग्गामार वाहनों का सहारा ले लेते है।