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बेमौसम बारिश से किसानों के चेहरें पर चिंता की लकीरें

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उरई। बेमौसम बारिश ने किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खड़ी कर दी हैं। आएदिन मौसम के बदलाव से न सिर्फ किसान दुखी है, बल्कि आम आदमी भी परेशान है।
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खेतों में खड़ी फसल, खलिहानों में कटी फसल दोनों को ही बारिश से नुकसान हो रहा है। किसानों की फसल पक चुकी है और पकी फसल पर कुदरत का कहर टूट रहा है। किसानों का मानना है कि यदि जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। सिरसाकलार के किसान धर्मेंद्र का कहना है कि आएदिन बदल रहे मौसम से फसलों से नुकसान पहुंच रहा है।

बदली और तेज हवाओं के साथ बारिश से गेहूं की फसल गिर रही है। जिससे दाना पलता हो जाएगा और पैदावार भी कम होगी। अगर यही हालत रही तो लागत भी निकलना मुश्किल हो जाएगा। मुहम्मदाबाद के किसान किशोरीलाल कहते हैं कि इस समय मसूर, चना, मटर जैसी दलहनी फसलें पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। सिर्फ उनकी मड़ाई करके घर लाना है। ऐसे में रोजाना बदल रहे मौसम से फसल गीली हो रही है। जिसे रोज सुखाने के लिए पलटना पड़ता है। दाना खराब होने की भी संभावना है।
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दलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान
सरावन। बेमौसम बरसात ने फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार रात से रुक-रुक कर हो रही बारिश से दलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। किसान दयाशंकर पांडेय का कहना है कि मसूर की फसल पक चुकी है और उसकी कटाई हो रही है। बारिश होने से पकी फसल मिट्टी में चिपक गई है। अब जैसे ही धूप निकलेगी, वैसे ही धूप के कारण फलियां चटकने लगेगी, इससे किसान को नुकसान होगा। इसके अलावा सरसों की फसलें भी खेतों में ही बिछ गईं हैं।

गेहूं का दाना पतला होने का खतरा
सिरसाकलार। इस बेमौसम बारिश से किसानों की दलहनी व तलहनी फसलों को फायदा कम नुकसान ज्यादा है। ग्राम जटहौली के किसान धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि बदली और तेज हवाओं के साथ बारिश से अब गेहूं की बालियां गिरने का खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं इस फसल से गेहूं का दाना भी पतला हो जाएगा और उपज भी कम हो जाएगी। किसान देवेंद्र का कहना है कि यदि ऐसा ही होता रहा है किसान खुद फांकाकशी को मजबूर हो जाएगा। किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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अन्ना से बचाया तो बारिश ने नुकसान पहुंचाया
मुहम्मदाबाद। पहले तो किसान अन्ना जानवरों से परेशान था, किसी तरह अन्ना जानवरों से बचाकर फसल तैयार की लेकिन तैयार फसल पर कुदरत के अचानक मौसम बदलने से किसानों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। किसानों को जहां कटाई मड़ाई के लिए जहां सस्ते मजदूर मिल जाते थे, अब उन मजदूरों के लिए भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। हालत ये है कि बारिश से अपनी फसलों को बचाने के लिए कई किसान अध सूखी फसल को समेट कर घर ला रहे हैं।
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