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'आतंकवाद की आड़ में बंद निर्दोष मुसलमान होंगे रिहा'

Wed, 30 Jan 2013 08:59 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि समाजवादी पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र में यह साफ कहा था कि दशहतगर्दी के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में उत्तर प्रदेश के जिन बेकसूर मुसलिम नौजवानों को जेलों में डाला गया है, उन्हें फौरन रिहा ही नहीं कराया जाएगा बल्कि मुआवजे के साथ इंसाफ भी दिलाया जाएगा। सरकार आज भी चुनाव घोषणापत्र के सभी वायदों को पूरा करने के लिए कृत संकल्प है। सरकार ने इस दिशा में कार्यवाही भी शुरू कर दी है।
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मुख्यमंत्री ने यह भरोसा मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मिलने आए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेताओं को दिया। मंगलवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात और पार्टी की राज्य मंत्रिपरिषद की सदस्य सुभाषिनी अली ने मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास पर मिलकर ऐसे नौ युवकों की सूची और ज्ञापन सौंपा। साथ ही इन युवकों को रोजगार और मुआवजा देने की मांग की।

मार्क्सवादी नेताओं ने मुख्यमंत्री को नौ युवकों के नाम और उन पर दर्ज मुकदमों का विवरण भी सौंपा। विवरण में कहा गया है कि वासिफ हैदर, शफाअत रसूल, हाजी अतीक, गुलाम जीलानी (सभी कानपुर निवासी) को 8-8 वर्ष का समय जेल में बिताना पड़ा। कानपुर के ही मुमताज अहमद को तो 9 वर्ष जेल में बिताने पड़े। इसके अलावा कौशाम्बी के गुलाम जीलानी, सिद्धार्थनगर के अब्दुल मुबीन को जेल काटनी पड़ी।
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इनके साथ दो जम्मू कश्मीर के युवक बीलाल अहमद डार और गुलजार अहमद वानी भी जेल में बंद रहे। यह मुकदमे वर्ष 2001 से 2003 के बीच दर्ज किए गए। बाद में विभिन्न अदालतों ने इन्हें बरी घोषित किया। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इस विषय में विचार कर रही है। किसी निर्दोष के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
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