राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कहना है, ‘जो देश अपनी मां, बहन और बेटियों की रक्षा नहीं कर सकता उसे सभ्य कहलाने का हक नहीं है। बहन-बेटियों की सुरक्षा और उनका सम्मान सर्वोपरि है। दिल्ली में जो हुआ हम उस पर शर्मिंदा हैं। ऐसी वारदात केवल कानून से नहीं रोकी जा सकती हैं। इसके लिए मानसिकता बदलनी होगी और संस्कारों पर ध्यान देना होगा।’
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम इसे सुनिश्चित करेंगे। जनप्रतिनिधियों को वर्ष 2013 में महिलाओं की रक्षा और उनके सम्मान के लिए कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानमंडल की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने के मौके पर मंगलवार को उत्तरशती रजत जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति ने दिल्ली गैंगरेप की वारदात का उल्लेख किया।
महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान का लेना होगा संकल्प
उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी वारदात कहीं भी हो सकती हैं। कुछ संज्ञान में आती हैं और कई बार नहीं भी आतीं। ऐसी वारदात के रोकथाम के लिए हर भारतीय को महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान का संकल्प लेना होगा।