स्वामी चिन्मयानंद को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उनके खिलाफ निचली अदालत में चल रहे दुराचार के मुकदमे पर रोक लगा दी है। चिन्मयानंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी याचिका पर न्यायमूर्ति सुनील हाली ने सुनवाई की।
चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर की निचली अदालत में दुराचार और अन्य मामलों में मुकदमा चल रहा है। याची का कहना था कि पुलिस जांच में अन्य सभी आरोपों से उनको बरी कर दिया गया है। शिकायतकर्ता चिदर्पिता ने अदालत में उनके खिलाफ बयान दिया था जिसके आधार पर पुलिस ने दुराचार के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है।
न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। पक्षकारों से जवाब भी मांगा है। गौरतलब है कि चिदर्पिता ने 30 नवंबर 2012 को शाहजहांपुर जिले में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उन पर आरोप लगाया था कि स्वामी ने उसको बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी दी। इसके अतिरिक्त उनके साथ दुष्कर्म कर इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराया। चिदर्पिता वर्ष 2001 से स्वामी के साथ थीं। 2004 तक उनके बीच गुरु-शिष्य के संबंध थे।