तकनीक के इस युग में अब इबादत का तरीका भी हाईटेक हो रहा है। हाईटेक गैजेट लोगों के मददगार बन रहे हैं।
सदियों से इस्तेमाल हो रही सौ दाने की तस्बीह (माला) की जगह डिजिटल फिंगर काउंटर लेने लगा है।
मोबाइल और कंप्यूटर के लिए तमाम एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर भी खूब बिक रहे हैं।
डिजिटल टेक्नोलॉजी की छाप हर कहीं दिखाई दे रही है। इबादत के तरीके भले ही पुराने हों, लेकिन इसमें भी टेक्नोलॉजी ने जगह तलाश ली है।
चीन ने इस क्षेत्र के लिए भी कुछ गैजेट उतारे हैं। इसमें खास है डिजिटल फिंगर काउंटर। नमाजी कुछ खास कलमात तय तादाद में पढ़ने के लिए तस्बीह साथ रखते हैं।
अपना रही है नई पीढ़ी
अधिकतर सौ दानों वाली तस्बीह इस्तेमाल होती है। कभी लकड़ी, कभी पत्थर तो कभी मोती इसमें इस्तेमाल होते रहे। अब इसने भी डिजिटल रूप ले लिया है। रिस्ट वॉच की तरह डिजिटल फिंगर काउंटर को नई पीढ़ी अपना रही है। इसमें 10,000 तक गिनती की जा सकती है।
सफर में रहने वालों को सजदे की सही दिशा (किबले का रुख) बताने के लिए चीनी कंपास भी जरूरी सा बन गया है। इसके अलावा मोबाइल की तमाम एप्लीकेशन उपलब्ध हैं। कंप्यूटर के खास सॉफ्टवेयर भी हैं। इसमें कुरान शरीफ के अनुवाद से लेकर व्याख्या तक हिंदी-उर्दू में है।
बदलाव की दस्तक
मुरादाबाद के मशहूर मदरसे जामिया नईमिया के संस्थापक सदरुल फाजिल अल्लामा मौलाना मरहूम सैयद नईमुद्दीन मुरादाबादी के अनुवाद वाले कुरान सॉफ्टवेयर के भी कई वर्जन अब तक आ चुके हैं।
दावते इस्लामी के शहर अमीर शाने आलम अत्तारी बताते हैं कि मोबाइल डाउनलोडिंग और कंप्यूटर शॉप पर धार्मिक सॉफ्टवेयर और वीसीडी की बढ़ती मांग बदलाव की दस्तक दे रही है।
कुछ खास सॉफ्टवेयर
कंप्यूटर के लिए सबसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर कुरान के हैं। अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद और हर मसलक के जाने-माने उलेमा की तफसीर (व्याख्या) के साथ इन्हें मुफ्त आनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।
इसके अलावा सॉफ्टवेयर की सीडी धार्मिक साहित्य बेचने वालों के पास उपलब्ध हैं। इसके अलावा मोबाइल सॉफ्टवेयर भी हैं।
इसमें कुरान आटो रिसीटर, दुनिया के 25 हजार शहरों में अजान टाइम, आनलाइन किबला की दिशा, दुआएं, हदीस के अलग-अलग सॉफ्टवेयर हैं।
कुंभ में भी हुई बिक्री
माला की जगह डिजिटल काउंटर की बिक्री कुंभ मेले में भी खूब हुई। इसकी वजह से शहर में इन दिनों कमी हो गई है। कुछ महीने में इसके रेट भी बढ़े हैं। इस कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक कुंभ शुरू होने के बाद उन्हें सप्लाई नहीं मिल सकी है।
तस्बीह की जगह डिजिटल फिंगर काउंटर पर तय तादाद में कलमात पढ़ना और मोबाइल आदि पर कुरान की तिलावत करने में कोई हर्ज नहीं है।
-महमूद कासमी, दारुल उलूम के मुफ्ती
जो बेहतर तरीका है उसका इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है क्योंकि असल मकसद अल्लाह की इबादत है वो चाहे पुराने जमाने की तस्बीह से किया जाए या फिर नए जमाने के डिजिटल फिंगर काउंटर से इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
-अरशद फारुकी, मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के वरिष्ठ मुफ्ती