75 साल के रामनिवास पर पढ़ाई का जुनून सवार है। वह जिंदगी भर रूहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र बने रहना चाहते हैं। इसलिए वह दो साल बाद एमए में दाखिला लेते हैं। वह अब तक दस विषयों से एमए कर चुके हैं। आगे भी उनका यह सिलसिला बरकरार रखने का इरादा है।
संन्यासी रामनिवास यूं बदायूं के रहने वाले हैं, लेकिन काफी समय से यहां आर्य समाज मंदिर के बाहर रहते हैं। वह बीस सालों से रूहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र हैं और लगातार अलग-अलग विषयों में एमए कर रहे हैं।
संस्कृत विषय में एमए के साथ यह सिलसिला शुरू हुआ और अब तक वह दर्शनशास्त्र, शिक्षा शास्त्र, धर्मशास्त्र, मानव शास्त्र, अंग्रेजी, हिंदी साहित्य में एमए के अलावा एलएलबी की परीक्षा भी पास कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई से व्यक्ति अपने आपको ज्ञानी बनाता है और वह ज्ञान के प्रतिमान स्थापित करना चाहते हैं।
रामनिवास ने नेचुरोपैथी की भी पढ़ाई की है। वह लोगों का नेचुरोपैथी से इलाज भी करते है। खास बात यह है कि संन्यासी होने की वजह से वह न तो रुपये छूते हैं और न ही अपने पास रखते हैं। उनकी फीस भी विश्वविद्यालय अपनी ओर से जमा कर देता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने बीएड भी किया है। उन्होंने शिक्षक और लेखपाल की नौकरी दो साल के लिए की, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया और अब लगातार पढ़ाई ही कर रहे हैं।