हाथरस के के किला गेट स्थित पथवारी देवी, चामड़ गेट स्थित चामुंडा देवी, रमनपुर स्थित चामुंडा देवी, हाथरसी देवी, बौहरे वाली देवी व अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शाम को मंदिरों में देवी की मूर्तियों को आकर्षक पोशाक धारण कराई गई और मनोहारी शृंगार किया गया।
नवरात्र के पांचवें दिन 2 अप्रैल को श्रद्धालुओं ने देवी स्कंदमाता की आराधना की। सुबह मंदिरों में देवी प्रतिमाओं के जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा रहा तो शाम से लेकर रात तक देवी के मनोहारी शृंगार के दर्शन के लिए भक्त उमड़ते रहे। मंदिर देवी के जयकारों से गूंजते रहे।
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सुबह से ही देवी मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। दोपहर तक यह क्रम चला। शहर के किला गेट स्थित पथवारी देवी, चामड़ गेट स्थित चामुंडा देवी, रमनपुर स्थित चामुंडा देवी, हाथरसी देवी, बौहरे वाली देवी व अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शाम को मंदिरों में देवी की मूर्तियों को आकर्षक पोशाक धारण कराई गई और मनोहारी शृंगार किया गया। शाम से ही देवी के दर्शन के लिए भक्तों का मंदिरों में पहुंचना शुरू हो गया। देर रात तक मंदिरों में भक्तों का मेला लगा रहा। मंदिर सतरंगी रोशनी से जगमगाते रहे।
बैरी विनाश व रोग मुक्ति के लिए दीं आहुतियां
हाथरस शहर के रमनपुर स्थित चामुंडा देवी के मंदिर में आचार्य पंकज शास्त्री के नेतृत्व में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में चौथे दिन भी श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच आहुतियां दीं। यज्ञ में काली मिर्च और पीली सरसों की आहुतियां दी गईं। आचार्य पंकज शात्री ने बताया कि बैरी विनाश और रोग मुक्ति के लिए नीम गिलोय आदि की आहुतियां दी गईं। मंदिर के पीठाधीश्वर महंत पाताल गिरी ने कहा कि देवी के दरबार में भक्त जो भी सच्चे मन से मांगते हैं, उन्हें अवश्य मिलता है। इस मौके पर नागा बाबा संगम गिरी भी मौजूद रहे।