स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगे तैयार करतीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। स्रोत : स्वयं
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स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर जिले की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज बनाने में जुटी हैं। शासन के लक्ष्य के अनुसार 37 समूह कुल 1.68 लाख तिरंगे तैयार करेंगे। इस कार्य से महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाएं घरों और सामुदायिक कार्यस्थलों पर तिरंगे बना रही हैं। ये ध्वज निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए जा रहे हैं। इन तिरंगों का उपयोग सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न कार्यक्रमों में होगा।
प्रत्येक तिरंगा तैयार करने पर महिलाओं को 20 रुपये का भुगतान किया जाएगा। जिला प्रशासन सभी समूहों की निगरानी कर रहा है। उन्हें तय समय में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। महिलाओं का कहना है कि यह कार्य उन्हें रोजगार के साथ देशभक्ति से जोड़ रहा है। कई समूहों ने समय से पहले लक्ष्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय तक काम शुरू कर दिया है।
स्वत: रोजगार के जिला समन्वयक रंजन कुमार ने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा है। प्रत्येक ध्वज की सिलाई, रंगों और आकार की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही तिरंगों की आपूर्ति की जाएगी। स्वतंत्रता दिवस से पहले सभी तिरंगे संबंधित विभागों और संस्थानों तक पहुंचा दिए जाएंगे।
तिरंगा निर्माण से बढ़ रही महिलाओं की आय
तिरंगा निर्माण अभियान से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को घर के पास रोजगार मिल रहा है। प्रति तिरंगा 20 रुपये का भुगतान मिलने से उनकी अतिरिक्त आय बढ़ रही है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की शासन की योजना को मजबूत कर रही है। समूहों के माध्यम से यह योजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है।