समय के साथ महिलाओं की सोच और जरूरतें भी बदल रही हैं। इस बदलाव की तस्वीर हाथरस में भी देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में छात्राएं, गृहिणियां और कामकाजी महिलाएं स्कूटी चलाना सीख रही हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ ही रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता भी कम हो रही है।
पहले जहां कॉलेज, कोचिंग, बाजार या कार्यालय जाने के लिए महिलाओं को परिवार के किसी सदस्य या सार्वजनिक परिवहन का इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब स्कूटी चलाना सीखने के बाद वे अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी आसानी से आ-जा रही हैं। इससे समय की बचत होने के साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है।
शहर में पिछले कुछ वर्षों में स्कूटी सीखने वाली महिलाओं और युवतियों की संख्या लगातार बढ़ी है। इनमें कॉलेज की छात्राओं के साथ गृहिणियां और नौकरीपेशा महिलाएं भी शामिल हैं। कई महिलाएं स्कूटी सीखने के बाद नौकरी करने, बच्चों को स्कूल छोड़ने, बाजार जाने और छोटे-छोटे व्यवसाय संचालित करने में आसानी महसूस कर रही हैं।
15 साल से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं पूजा
शहर की नेहरू कॉलोनी निवासी पूजा मदान वर्ष 2011 से बेटियों और महिलाओं को निशुल्क स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। अब तक वह सैकड़ों छात्राओं, गृहिणियों और कामकाजी महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाना सिखा चुकी हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे शिक्षा, नौकरी, स्वरोजगार और रोजमर्रा के कार्यों के लिए किसी पर निर्भर न रहें।
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मैं पिछले 10 दिनों से स्कूटी सीख रही हूं। पहले मुझे साइकिल तक चलाना नहीं आता था, लेकिन अब स्कूटी चलाना सीखने के बाद आत्मविश्वास बढ़ गया है। अब मुझे कहीं आने-जाने के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
-पूजा कुशवाहा निवासी हाथरस।
स्कूटी सीखने के बाद काफी आत्मविश्वास आया है। पहले कहीं भी जाने के लिए ऑटो या परिवार के किसी सदस्य का इंतजार करना पड़ता था। अब मैं अपने काम खुद कर सकती हूं और कहीं भी आसानी से आ-जा सकती हूं।
-लकी शर्मा निवासी हाथरस।