कोरोना के बाद से लोगों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि हुई है। कोरोना के समय में काफी समय तक लोग अपने-अपने घरों में रहे। इस कारण वह कहीं न कहीं मानिसक तनाव का शिकार हुए हैं। ठंड के मौसम में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामले सामने आते हैं। खासतौर पर सर्दी में लोग विंटर डिप्रेशन यानी शीतकालीन अवसाद का शिकार हो जाते हैं।
शहर की रहने वाली 23 वर्षीय एक युवती अपने माता-पिता के साथ नींद कम आना, खाना अत्यधिक खाना, वजन का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, किसी काम में मन न लगना, बात-बात में रोना, सिर में दर्द की समस्या को लेकर मानसिक स्वास्थ्य विभाग में पहुंची। युवती के परिजनों ने बताया कि उसे यह दिक्कत साल 2020 की सर्दी के मौसम से है। शुरुआत में उन्हें लगा था कि युवती बहाने बना रही है, लेकिन उसकी परिस्थिति ज्यादा गंभीर हो गई।
इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा युवती को हर दिन व्यायाम करने, पौष्टिक आहार लेने, सोने और जागने का वक्त निर्धारित करने और अपनी दिक्क्तों को साझा करने के लिए कहा गया। इसके साथ युवती को रोज एक लक्ष्य बनाकर काम करने के लिए भी कहा गया। अब युवती की स्थिति में पहले सुधार है।
यह हैं लक्षण
मन उदास रहना, खुशी न महसूस करना, प्रतिदिन के कार्य पहले की तरह न कर पाना, पहले जिन कार्यों को करने में मन लगता था, अब मन न लगना, छोटी-छोटी बातों में गुस्सा या चिड़चिड़ापन होना, रोना आना, भूख कम या ज्यादा लगना, वजन बढ़ना, लोगों से मिलना जुलना कम कर देना, पढ़ाई में मन न लगना शीतकालीन अवसाद के प्रमुख लक्षण हैं।
विशेषज्ञ की सलाह
शीतकालीन अवसाद की समस्या सर्दियों के महीनों में आती है और बसंत के शुरू होने पर खत्म हो जाती है। इस अवस्था में लोग अपने जीवन को सुखद नहीं महसूस करते है, जिससे रोजमर्रा के कार्य करने में कठिनाई होती है। इससे बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। इसके अलावा सोने के लिए एक समय तय करना चाहिए और अपनी समस्याओं को साझा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि कोई शीतकालीन अवसाद की समस्या से परेशान है तो वह जिला अस्पताल में बने मनकक्ष में काउंसिलिंग के लिए आ सकता है।
-नीलिमा मधु हांसदा, साइकेट्रिस्ट सोशल वर्कर, जिला अस्पताल
सर्दी के मौसम में ठंड के कारण नर्वस सिस्टम सिकुड़ने लगता है, जिससे दिमाग पर असर पड़ता है। व्यक्ति हाइपोथर्मिया का भी शिकार हो सकता है। यह सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर डिप्रेशन का रूप है। यह डिप्रेशन डाइट को प्रभावित, नींद न आना, भावनात्मक रूप से कमजोर कर देने वाला होता है।
-डॉ. एमआई आलम, नोडल अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य