शिखा कहती हैं पति का जीवन ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। भगवान ने मुझे हिम्मत दी कि मैं उनका जीवन बचा सकी। करवा चौथ के अवसर पर यह जोड़ा अब न सिर्फ एक पर्व मना रहा है, बल्कि प्यार, त्याग और समर्पण का प्रतीक बन गया है।
हैपेटाइटिस-बी के संक्रमण से पति की जिंदगी रोजाना कम होती जा रही थी, लिवर 80 फीसदी खराब हो गया, नौकरी भी छूट गई लेकिन शिखा ने हार नहीं मानी सबसे पहले अपना लिवर डोनेट कर पति को मौत के मुंह से बाहर खींच लाई, फिर काम-धंधे में मदद कर जिंदगी की गाड़ी को दौड़ाने में मदद की।
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हाथरस शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी हिमांशु गुप्ता की तबीयत वर्ष 2019 में अचानक बिगड़ गई थी। जांच में हैपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके कारण उनका लिवर 80 प्रतिशत तक खराब हो गया था। हालत लगातार बिगड़ रही थी, इलाज के दौरान उन्हें हैदराबाद में अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ गई। पति की बिगड़ती हालत देखकर उस समय करीब 45 साल की रहीं शिखा ने सुहाग को बचाने के लिए बेझिझक अपनी जान की परवाह किए बिना लिवर डोनेट करने का निर्णय लिया।
हिमांशु ने बताया कि यह ऑपरेशन जोखिम भरा था, लेकिन शिखा की हिम्मत और सकारात्मक सोच से ट्रांसप्लांट सफल रहा। पति की नौकरी छूटने के बाद काम-धंधे को नये सिरे से चलाने में मदद की। दंपती अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शिखा कहती हैं पति का जीवन ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। भगवान ने मुझे हिम्मत दी कि मैं उनका जीवन बचा सकी। करवा चौथ के अवसर पर यह जोड़ा अब न सिर्फ एक पर्व मना रहा है, बल्कि प्यार, त्याग और समर्पण का प्रतीक बन गया है।