किस बात की जानकारी ली जा रही है। मैडम.. कहीं इनकम टैक्स का चक्कर तो नहीं पड़ेगा या राशन कार्ड तो नहीं कट जाएगा। जनगणना में एसी, गाड़ी की जानकारी मांगने का क्या मतलब? सादाबाद के कूपा गली में जवाब की जगह सवालों की झड़ी ने प्रगणक प्रियंका उपाध्याय को उलझन में डाल दिया।
उन्होंने मकान मालिक राजू को समझाया कि केवल जानकारी एकत्रित की जा रही है। यह जानकारी कहीं लीक नहीं होती। ये जानकारियां सरकार को नीतियां बनाने में सहायक होती हैं। वे बोलीं कि जनगणना में मदद करना देश निर्माण में योगदान देने के बराबर है। जिले में प्रगणक इन दिनों इन्हीं चुनौतियों से जूझ रहे हैं। तेज धूप व 46 डिग्री का तापमान उन्हें परेशान नहीं कर रहा, लेकिन हर घर से आ रहे सवालों के तीर उन्हें मानसिक रूप से थका रहे हैं।
सासनी : राशन कार्ड कटने के डर से भड़क रहे लोग
सासनी के कोतवाली चौराहा मोहल्ले में प्रगणक डॉ. पुष्पेंद्र और डॉ. सपना ने जब रेवेंद्र कुमार शर्मा के घर दस्तक दी, तो शुरुआती जानकारी (14 सदस्यों का परिवार) उन्होंने आराम से दे दी, लेकिन जैसे ही प्रगणक ने एसी, बाइक और कार को लेकर सवाल किया, रेवेंद्र असमंजस में पड़ गए। उन्होंने डर जताते हुए कहा कि इस डाटा से सरकार उनका राशन कार्ड काट देगी।
वहीं, जब टीम कलावती नाम की बुजुर्ग महिला के घर पहुंची, जो अकेली रहती हैं, तो वे ज्यादा सवाल-जवाब सुनकर भड़क गईं। उन्होंने रोष जताते हुए कहा, सरकार राशन कार्ड बंद कर देगी, मेरा तो कोई सहारा नहीं है। इस क्षेत्र में कुल 300 घर हैं, जिनमें से बृहस्पतिवार को केवल 30 घरों का सर्वे पूरा हो सका।
हाथरस जंक्शन : पांच मिनट की पूछताछ के लिए 20 मिनट की समझाइश
नगला नत्थू गांव में प्रगणक पूनम सिंह को भी इसी तरह की हिचकिचाहट का सामना करना पड़ा। जब वे विक्रम सिंह के घर पहुंचीं, तो उनकी पत्नी ने दरवाजा खोला। जनगणना के सवालों पर उन्होंने तुरंत आशंका जताई कि कहीं उनकी एलपीजी गैस की सब्सिडी या राशन कार्ड की सुविधा बंद तो नहीं हो जाएगी। पूनम सिंह और उनकी टीम को महिला को समझाने में ही पांच मिनट से अधिक का समय लग गया। इसके बाद योगेश कुमार के घर पर भी प्रगणकों को यही पूरी प्रक्रिया और सफाई दोबारा दोहरानी पड़ी।