सरकारी तंत्र बेशक स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन धरातल पर यह अभियान बेअसर ही नजर आता है।शहर के संकरे और छोटे मगर करोड़ों का कारोबार करने वाले बाजारों में जगह की कमी से सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका है। जिन बाजारों में सार्वजनिक शौचालय बने हैं, उन पर ताला लटका है। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना बाजार में आने वाली महिलाओं को करना पड़ता है।
800 मीटर के दायरे में बाजार, पर शौचालय नहीं
शहर का पुराना व प्रमुख कपड़ा व सौंदर्य प्रसाधन बाजार 800 मीटर में सिमटा है। पंजाबी मार्केट, रामलीला मैदान, बागला मार्ग, बैनीगंज व चूड़ी वाली गली में बड़ी संख्या में महिलाओं का आना-जाना रहता है। ये बाजार शहर की रीढ़ हैं, जहां हर साल करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन इनमें से किसी भी बाजार में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है।
शहर में 11 शौचालय, एक भी बाजार में नहीं
नगर पालिका के शहर में 11 सार्वजनिक शौचालय हैं, लेकिन एक भी बाजार में नहीं है। आगरा-अलीगढ़ और मथुरा-कासगंज रोड पर शौचालय बने है। इनकी देखरेख ठेके पर हो रही है। प्रत्येक शौचालय पर एक कर्मचारी तैनात है। बैनीगंज में खरीदारी करने पहुंचीं उज्ज्वला देवी ने बताया कि आपात स्थिति में बहुत परेशानी होती है। कई बार ऐसा हुआ कि बिना खरीदारी के ही बाजार से लौटना पड़ा।
ताला तो खुला, अंदर गंदगी का अंबार
दोपहर 12 बजे मधुगढ़ी चौराहा स्थित शौचालय बंद मिला। यहां ताला तो खुला हुआ था, लेकिन अंदर गंदगी का अंबार था। यहां हर समय मौजूद रहने वाले यातायात पुलिस कर्मियों ने बताया कि यहां कोई कर्मचारी नहीं रहता और न ही कोई शौचालय का प्रयोग करने आता है।
महिला शौचालय पर पुरुष कर्मचारी
मोहनगंज पर महिला शौचालय का गेट खुला मिला। यहां पुरुष कर्मचारी बैठा हुआ था। कर्मचारी ने बताया कि पहले शौचालय दो हिस्सों में था। पुरुष गेट पीछे से था। अब बीच की दीवार तोड़ दी गई है। महिला गेट से ही पुरुष जाते हैं। यहां महिलाएं नहीं आतीं।
महिला शौचालयों पर लगा ताला
मेंडू रोड सिटी स्टेशन के बाहर शौचालय के महिला गेट पर ताला लगा मिला। अलीगढ़ रोड स्थित मुंशी गजाधर सिंह मार्ग स्थित शौचालय पर भी ताला लगा मिला। यहां तैनात पुरुष कर्मचारी ने बताया कि काफी समय से महिला शौचालय बंद है। यहां पानी भी नहीं आता।
देर रात तक पेशाब रोकना घातक
बागला जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि देर तक पेशाब रोकने से ब्लैडर में बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं, जिससे महिलाओं में यूटीआई का खतरा बहुत बढ़ जाता है। बार-बार ऐसा करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे भविष्य में अधिक समस्या हो सकती है। लंबे समय तक पेशाब न जाने से पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन, दर्द और किडनी या ब्लैडर में स्टोन होने की आशंका बढ़ जाती है।
बाजार बहुत संकुचित हैं। कई बार प्रयास किया गया, लेकिन यहां जगह उपलब्ध न होने से शौचालय नहीं बन सके हैं। शहर में 11 शौचालय हैं और सभी क्रियाशील हैं। थर्ड पार्टी के लिए इन्हें संचालित किया जा रहा है। यदि कहीं दिक्कत है तो निरीक्षण कर खामियों को दूर कराया जाएगा।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस