ब्लॉक हसायन के ग्राम पंचायत हरीनगर छीतूपुर में वेटलैंड भूमि को पर्यटन के देखते हुए विकसित किए जाने को लेकर डीएम अर्चना वर्मा ने प्रस्तावित कार्यों को तीन चरणों में विभक्त करते हुए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रथम चरण के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों को तत्काल प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बीडीओ को वेटलैंड भूमि से गुजर रहे नाले की सफाई कराने, नाले की पटरियों का चौड़ीकरण कराते हुए पौधरोपण कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि वेटलैंड भूमि पर गंदा पानी किसी भी दशा में नहीं आना चाहिए। प्रभागीय वनाधिकारी को वेटलैंड भूमि के चारों ओर पैमाईश कराते हुए मार्किंग पत्थर लगवाने तथा मनरेगा के माध्यम से कच्ची मिट्टी की चाहरदीवारी का कार्य कराने के निर्देश दिए। प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि वेटलैंड में सादाबाद, हाथरस एवं सिकंदराऊ रेंज शामिल है। इसके अन्तर्गत समस्त राष्ट्रीय, प्रांतीय अन्य राजमार्गों, समस्त नहरों तथा समस्त रेलवे लाइनों की पटरियाँ जो रक्षित वन घोषित की गई। छीतूपुर वेटलेण्ड हाथरस शहर से लगभग 20 किमी दूर तहसील सिकंदराराऊ विकास खंड हसायन के ग्राम पंचायत छीतूपुर में क्षेत्रफल 20 हेक्टेयर का एक विशाल एवं महत्वपूर्ण जलमग्न क्षेत्र है। जिसमें प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में न सिर्फ देशी बल्कि विदेशी पक्षी भी यहां आते हैं।
देशी व विदेशी प्रजाति के मिलते हैं पक्षी
वेटलैंड में देशी प्रजाति के ओपनविल्ड स्टार्क, ब्हाइट आइविस, डार्टर, कार्मोनेन्ट, सारस क्रेन, पेन्टिड स्टार्क, व्हाइट ब्रस्टेड किंगफिसर, पाईक किंगफिसर, बी-ईटर, ड्रोंगो, पनडुब्बी, पनकौवा, जलकोवा, कठफोड़वा, मोर, पैराकीट्स, जंगल फाउल, पारटीजस, तीतर, कौआ, कोयल, मैना, वैया, कबूतर, गौरैया, बतख, बाज, उल्लू, नीलकण्ड आदि पक्षी मिलते है। प्रवासी प्रजाति के गीज, टील, कृट, पिंटेल, रेडक्रेस्टेड पोचार्ड, शॉवलर, विजन, ब्राह्मणी डक, कॉमन टील्स, राजहंस, फोनिकोप्टेरस माइनर, र्स्टोक्स आदि मिलते है।छीतूपुर वेटलेण्ड के अन्तर्गत काफी संख्या में राज्य पक्षी सारस भी देखे जाते है। राज्य पक्षी सारस का एक महत्पूर्ण वासस्थल के रूप में स्थापित हो गया है।
वेटलैंड विकसित होने से मिलेगा रोजगार
छीतूपुर वेटलैंड को विकसित करने से परिस्थतिकीय विकास एवं सन्तुलन, जैवविधता संरक्षण, स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक वास का विकास एवं संरक्षण, राज्य पक्षी सारस का संरक्षण एवं विकास, वन्य जीवों की सुरक्षा संवर्धन एवं विकास, भू-गर्भ जल का संरक्षण एवं वृद्धि, कृषि एवं उद्यान का विकास, पर्यटन का विकास एवं इसके माध्यम से स्थानीय जनता को रोजगार के साथ उपलब्ध कराना है।