कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण बच्चे जल्दी बुखार और सर्दी-जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में हुई खून की जांच में उनमें विटामिन ए की कमी पाई गई है। विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से घट रही है। यही वजह है कि बच्चे आजकल बहुत जल्दी बीमार पड़ रहे हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ''विटामिन ए संपूर्ण कार्यक्रम'' शुरू किया है। इसके तहत जिले के 1,91,824 बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ.प्रमोद कुमार ने बताया कि 100 बीमार बच्चों में से 42 में विटामिन ए की कमी के लक्षण दिखते हैं। जिला अस्पताल की लैब में अभी विटामिन ए की जांच की सुविधा नहीं है। चिकित्सक लक्षणों के आधार पर ही उपचार करते हैं। सीएमओ डाॅ. वेदप्रकाश ने बताया कि सही आहार की कमी से बच्चों में विटामिन ए की कमी होती है।
बच्चों में विटामिन ए की कमी के गंभीर परिणाम
विटामिन ए की कमी से बच्चों की आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके चलते वे बार-बार बुखार, सर्दी और जुकाम की चपेट में आते हैं। कुपोषण और अन्य बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। यह कमी बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
अभियान और आयरन सिरप का वितरण
इस बार जिले के सभी ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस सत्रों पर टीकाकरण के साथ खुराक मिलेगी। नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी। इस वर्ष विटामिन ए संपूर्ण कार्यक्रम के साथ एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम भी जोड़ा गया है। इसके तहत छह माह से 59 माह तक के बच्चों को आयरन फोलिक एसिड सिरप दिया जाएगा। यह सिरप बच्चों को खून की कमी से बचाने में मदद करेगा।