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लाव-लश्कर संग विनोद-ओमवती ने भरे पर्चे

Fri, 01 Jan 2016 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे/हाथ्ारस
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए शुक्रवार को संभावना के मुताबिक दो ही नामांकन दाखिल हुए। बसपा की तरफ से पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई विनोद उपाध्याय ने पूरे लाव-लश्कर के साथ पर्चा भरा तो सपा की तरफ से हसायन की ब्लॉक प्रमुख ओमवती यादव भी सत्तापक्ष के अलावा अन्य दलों के नेताओं के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचीं।
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सबसे पहले ओमवती यादव अपने काफिले के साथ पर्चा भरने पहुंचीं। उन्होंने डीएम अबरार अहमद और एडीएम डीपी सिंह के सामने दो सेटों में नामांकन पत्र दाखिल किया। प्रथम सेट में उनके प्रस्तावक के रूप में जिला पंचायत सदस्य श्याम सिंह और रालोद समर्थित सदस्य प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू थे, जबकि दूसरे सेट में उनकी प्रस्तावक मीनू यादव और राजाराम फौजी थे। उनके साथ विधायक देवेंद्र अग्रवाल, विधायक जलेसर रणजीत सुमन, पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, पूर्व विधायक डॉ. अनिल चौधरी, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी भाजुद्दीन, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज यादव, बबलू यादव, मूलचंद्र निम, रालोद जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठेनुआं, जसवंत सिंह यादव, मुन्ना सिंह एडवोकेट, विशंभर सिंह एडवोकेट, प्रकाश अग्रवाल, रामनारायण काके, कृष्णमुरारी वार्ष्णेय, रवि पहलवान, ठा.रजनेश सिंह, अनिल वार्ष्णेय आदि मौजूद थे।


बसपा की ओर से विनोद उपाध्याय ने भी दो सेटों में नामांकन दाखिल किया। प्रथम सेट में प्रस्तावक चौधरी पुष्पेंद्र कुमार और मुरसान ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय, दूसरे सेट में प्रस्तावक सरोज उपाध्याय और रामवती बघेल थीं। उनके साथ अन्य प्रमुख लोगों में पूर्व ऊर्जा मंत्री सिकंदराराऊ विधायक रामवीर उपाध्याय, सदर विधायक चौधरी गेंदालाल, बसपा जिलाध्यक्ष दिनेश देशमुख, अतुल शर्मा, केके दीक्षित, गिरीश पचौरी, लवकुश शर्मा सहित बड़ी संख्या बसपाई मौजूद थे।
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कलेक्ट्रेट में उफान पर रही सियासी सरगर्मी
हाथरस। नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट में दिन भर खासी गहमागहमी रही। जिले के सभी राजनीतिक दलों के दिग्गजों का एक ही परिसर में जमावाड़ा लंबे समय बाद दिखाई दिया। कलेक्ट्रेट परिसर का नजारा किसी सदन से कम नहीं था। जिले की राजनीति के सभी दिग्गज यहां पहुंचे। एक मौका तो ऐसा भी आया, जब दोनों खेमों के नेता आमने-सामने भी आए। उस समय प्रशासन की सांस अटक गई। अफसरों को डर था कि कहीं दोनों में शक्ति प्रदर्शन की नौबत नहीं आ जाए। यही वजह है कि सत्तापक्ष के नामांकन के दौरान अधिकारियों ने बसपाई दिग्गजों को कलेक्ट्रेट मीटिंग हॉल में पहुंचा दिया।
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