अलीगढ़ रोड पर एक ढकेल पर बिकतीं सब्जियां। संवाद
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भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की थाली से हरी सब्जियां दूर होती जा रही हैं। स्थानीय फसल न होने के कारण हाथरस की मंडियों में मध्य प्रदेश और राजस्थान से सब्जियां मंगानी पड़ रही हैं, जिससे इनके दाम आसमान छू रहे हैं। अलीगढ़ रोड स्थित सब्जी मंडी में भिंडी, अरबी और तोरई के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
वर्तमान में हाथरस की मंडी में अरबी खंडवा व ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से आ रही है, जबकि भिंडी और तोरई की आवक कोटा, बूंदी व भरतपुर (राजस्थान) से हो रही है। लंबी दूरी से आने के कारण ट्रांसपोर्टेशन, पैकिंग और आढ़त का खर्च बढ़ गया है। थोक मंडी में ही इन सब्जियों की कीमत 50 रुपये प्रति किलो के पार है, जो फुटकर बाजार तक पहुंचते-पहुंचते दोगुनी हो जा रही है।
सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि जिले की अपनी भिंडी, अरबी और तोरई की फसल तैयार होने में अभी 15 से 20 दिन का समय और लगेगा। जब तक स्थानीय फसल की आवक शुरू नहीं होती, तब तक कीमतों में गिरावट की उम्मीद कम है। स्थिति यह है कि फुटकर विक्रेता आगरा की मंडी से भी सब्जियां मंगाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान से आवक होने के कारण अरबी, भिंडी और तोरई थोक में ही 50 रुपये किलो पड़ रही है। पूर्णिमा की छुट्टी होने के कारण मंडी बंद थी। ऐसे में फुटकर दुकानदारों ने आगरा से माल मंगाकर 80 से 100 रुपये किलो तक बेचा है।
— गोपाल अग्रवाल, थोक विक्रेता
बाहर से सब्जी आने पर पैकिंग और भाड़े का खर्च बहुत ज्यादा आता है। गर्मी के कारण लोकल फसल आने में अभी समय है। जैसे ही क्षेत्र की अपनी सब्जियां मंडी में आएंगी, कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी।
-राजू, फुटकर विक्रेता